इस बीच, उफनती नदी में डोंगी के चलते दिखने से आंखों में थोड़ी चमक आती है। ये डोंगी आसपास के केवटों के मछली पकडऩे में इस्तेमाल होती हैं। डोंगी नदी के किनारे आई तो सरगांव से हमारी यात्रा में जुड़े जोगिन्दर सिंह ने आंधू केवट से बात की। वह थोड़ा ना-नकुर करने के बाद हमें नदी पार कराने को तैयार हो गया। डोंगी में केवट के साथ चार लोग ही बैठ सकते हैं। उफनती नदी को डोंगी से पार करने का यह नया अनुभव है। सभी साथियों के चेहरे पर थोड़ा तनाव साफ दिखता है। लेकिन, मदकू द्वीप तक जाने का उत्साह भी है। खैर, हम डोंगी पर सवार हो गए। कुछ देर में द्वीप के किनारे लगते ही सभी के चेहरे दमक उठे। स्वाभाविक भी है, क्योंकि सभी के चेहरों पर तनाव की जगह उत्साह साफ दिखने लगा।