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UGC Rules : यूजीसी की नई गाइडलाइन पर केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत क्या बोले

UGC Rules : यूजीसी की नई गाइडलाइन पर केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा इस मुद्दे पर मेरा बोलना अब उचित नहीं है।

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Union Minister Gajendra Singh Shekhawat big statement on new UGC guidelines know what he said

केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत। फोटो पत्रिका

UGC Rules : यूजीसी गाइडलाइन को लेकर बवाल मचा है। पर सुप्रीम कोर्ट इस पर रोक लगा दी है। जिसके बाद चारों तरफ खुशियों का माहौल बन गया है। इस मामले पर केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बड़ा बयान दिया।

जोधपुर के सर्किट हाउस में गुरुवार देर शाम एक प्रेस वार्ता में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि सरकार इस पर फैसला लेने की प्रक्रिया प्रारंभ कर चुकी थी। पर सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पुन समीक्षा के लिए कहा है।

जब उनसे पूछा गया कि जब यह कानून बन गया, तो शिक्षा मंत्रालय या बाकी लोग क्या कर रहे थे? इस पर शेखावत ने कहा कि सांसदों के बनाए गए नियम-कानून पर बोलना मुझे उचित नहीं लगता है। संसद में सांसदों की कमेटी जिसकी अध्यक्षता विपक्ष के पास थी, उस कमेटी के सांसदों ने इस परामर्श किया था। जब सांसदों के परामर्श से उन्होंने अपने विवेक से निर्णय किया, तब उस पर टिप्पणी करना अब उचित नहीं है।

भारत विकसित होगा, तो यह सब बदल जाएगा

वर्ग भेद कब खत्म होगा? इस पर मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा कि यह समानता के अधिकार पर प्रहार है। भारत में हजारों साल से जो व्यवस्था बनी हुई है, उस व्यवस्था के दूषित होने से जो दुष्परिणाम हुए थे, मुझे लगता है कि हजारों वर्षों के पतन को 70 साल में ठीक कर दिया जाए। इसकी अपेक्षा नहीं होनी चाहिए। इसमें निश्चित रूप से समय लगेगा और जब एक समय आएगा भारत विकसित होगा, तो यह सब बदल जाएगा।

अल्पकालीन प्रयास नहीं दीर्घकालीन योजना के साथ होगा विकास

राष्ट्रपति के अभिभाषण और इकोनॉमिक सर्वे की रिपोर्ट के बारे में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि भारत अल्पकालीन प्रयास नहीं दीर्घकालीन योजना के साथ विकास की ओर आगे बढ़ रहा है।

तात्कालिक की बजाय दीर्घकालीन रूप से पीएम के नेतृत्व में सरकार सामाजिक सरोकार के तहत गरीब के जीवन में बेहतरी के लिय काम कर रही है। सरकार का प्रयास है कि राजकोषीय घाटे को 4.5 प्रतिशत से कम रखना है।

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