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पनीर खाने के शौकीन हैं तो रहिए अलर्ट, आपकी थाली में है नकली पनीर

रेलवे पुलिस ने राजधानी के रेलवे स्टेशन पर 360 किलो नकली पनीर जब्त किया है। त्योहारी सीजन के मद्देनजर इसे रायपुर बाजार में खपाने लाया जा रहा था।

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deepak dilliwar

Jul 04, 2017

 Be Alert, cheesy paneer

Be Alert, cheesy paneer

रायपुर.
रेलवे पुलिस ने राजधानी के रेलवे स्टेशन पर 360 किलो नकली पनीर जब्त किया है। त्योहारी सीजन के मद्देनजर इसे रायपुर बाजार में खपाने लाया जा रहा था। नकली पनीर अमरकंटक एक्सप्रेस से बरामद किया गया है। सूचना पर खाद्य एवं औषधि विभाग की टीम मौके पर पहुंच चुकी है। मामले की जांच कर रही है।


बताया जा रहा है कि टैक्स चोरी की आशंका से इतने बड़े पैमाने पर इसे टे्रन से लाया जा रहा था। इसमें आरोपी का नाम किशनचंद बताया जा रहा है, जो भोपाल से रायपुर भेजा था। अनूपपुर से नकली पनीर का कारोबार संचालित किया जा रहा है, जहां पर नकली पनीर बनाने की बड़ी फैक्ट्री है। यहां से अन्य जगहों पर इसकी सप्लाई की जा रही है।


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यहां पर कारोबार जारों पर

बाजार में दूध और उससे संबंधित उत्पाद बनाने (दही, पनीर, खोवा, मिठाई) की मांग बढऩे से आजकल सिंथेटिक अथवा नकली दूध का कारोबार जोरों पर है। दूध की सप्लाई कम कम और डिमांड अधिक होने से सिंथेटिक दूध और उससे बने अन्य उत्पाद बाजार में बेधड़क बेचे जा रहे हैं। सिंथेटिक दूध के उत्पाद में लागत कम होती है और मुनाफा ज्यादा। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार देश में दूध की गुणवत्ता विश्व व्यापार संगठन के मापदंड से कमतर है। छत्तीसगढ़ समेत हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तरप्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश आदि राज्यों में भी नकली दूध व पनीर खपाने का काम जोरों पर है।


ऐसे बनता है नकली (सिंथेटिक) दूध

सिंथेटिक दूध बनाने के चार तरीके हैं। दूध बनाने के लिए तेल, यूरिया, कास्टिक सोडा, नमक, पानी और चीनी को मिलाया जाता है। दूसरे में सूरजमुखी तेल, खाद्य तेल, सपरेटा दूध, यूरिया, कास्टिक सोडा, नमक, पानी और चीनी को मिलाया जाता है। तीसरे चरण में कैस्टर आयल, सपरेटा, दूध, यूरिया, आम तरल साबुन और पानी मिलाया जाता है और चौथे चरण में बनाई पेस्ट में कैमिकल्स को पानी में मिलाकर उसमें सपरेटा दूध मिलाया जाता है। इन्हीं चार तरीकों से दूध और उससे संबंधित खोवा और पनीर आदि बनाकर बाजार में बेचे जा रहे हैं।



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मिल्क पाउडर से नकली पनीर

गर्मी में पनीर की मांग को पूरा करने मिलावटखोर मिल्क पाउडर से भी नकली पंनीर बनाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार सपरेटा दूध या मिल्क पाउडर में सिर्फ डेढ़ फीसदी तक फेट तैयार हो जाता है। इससे पनीर बनाने के बाद दूध प्रोटीन केसिन ही रह जाता है। यह नकली पनीर केसिन असली पनीर के मुकाबले ज्यादा कड़ा होता है। इसका स्ट्रैक्चर रबड़ की तरह होता है। देखने में यह नकली पनीर (केसिन) आम पनीर की तरह ही दिखता है। पकने के बाद इसके स्वाद को भी पहचानने में मुश्किल होती है। केसिन पनीर की सप्लाई होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों और दुकानों में की जाती है। सब्जी बनाने के बाद इसको पहचानना मुश्किल हो जाता है।


इस तरह बनता है नकली खोवा

शहरों से लेकर महानगरों में ऐसे गिरोह सक्रिय हैं, जो आर्डर पर जितना भी खोवा चाहिए। आपकों उपलब्ध करवा देंगे। नकली खोवा बनाने 1 किलोग्राम डालडा में दो चम्मच ईजी पाउडर पहले मिक्सी में फेटा जाता है। बाद में वाशिंग मशीन में 2 किलोग्राम पानी डालकर दस मिनट तक घुमाया जाता है। इससे 20 किलोग्राम सपरेटा दूध में 5 किलोग्राम असली दूध मिलाकर इसमें आधा लीटर धारा रिफाइंड मिलाया जाता है। फिर थोड़ा-सा दूध पाउडर मिला दिया जाता है। इससे छह किलोग्राम खोवा तैयार हो जाता है। आमतौर पर 4 किलो दूध से 1 किलोग्राम खोवा निकलता है। इस खोवे को तैयार करने में 70 से 80 रुपए खर्च होते हंै तब केवल 40 या 50 रुपए किलोग्राम के हिसाब से बाजार में कैसे बेचा जा सकता है।


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मिठाई में भी खिलवाड़
सपरेटा दूध या मिल्क पाउडर से नकली पनीर केसिन तैयार करने में कीमत आधी रह जाती है। तीज व त्यौहारों पर महानगरों के बाजारों में नकली खोया व रंग-बिरंगी मिठाइयों से सजनी शुरू हो जाती है। जलेबियों का रंग कहीं गाढ़ा लाल, तो कहीं हल्का पीला, लड्डू भी कई रंगों में मिलते हैं। बर्फी चॉकलेटी हो या काजू वाली रंग अलग-अलग होते हैं। खोवे से बनी मिठाइयों पर नजर डालें तो आप शायद गिनती भूल जाएंगे। मिठाइयों को रंग-बिरंगी बनाने के लिए दुकानदार कौन-कौन से कैमिकल्स रंग प्रयोग करते हैं। यह जानकर भी आप डर जाएंगे।


इस तरह करें पहचान

सिंथेटिक दूध की पहचान का एक तरीका है। उसे उबालने या देर तक रखने से रखने से इसका रंग पीला हो जाता है। जबकि प्राकृतिक दूध के रंग में कोई बदलाव नहीं होता है। नकली दूध और उसके बने उत्पाद खोवा, पनीर और मिठाई खाने से कई बीमारियां हो सकती हैं।
जैसे-


1
.कास्टिक सोडा व यूरिया से हृदय, लीवर व किडनी को नुकसान।

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2
. कास्टिक सोडे से सांस की बीमारियों, आंतडिय़ों के जख्म, गाल ब्लैडर का कैंसर।






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