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हेल्थ स्मार्ट कार्ड बनवाना हुआ महंगा, अब देनी पड़ेगी इतनी फीस

बीमा कंपनी और शासन के बीच इसी सप्ताह एमओयू हो जाएगा। इसके बाद से प्रदेश भर में 10 लाख नए कार्ड बनाए जाएंगे।

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हेल्थ स्मार्ट कार्ड बनवाना हुआ महंगा, अब देनी पड़ेगी इतनी फीस

रायपुर. बीमा कंपनी और शासन के बीच इसी सप्ताह एमओयू हो जाएगा। इसके बाद से प्रदेश भर में 10 लाख नए कार्ड बनाए जाएंगे। इसके लिए जोड़े जाने वाले परिवारों को 60 रुपए कंपनी को चुकाने होंगे। टेंडर शर्तों के अनुसार कार्ड बनाने की कीमत में इजाफा किया गया है। अभी तक कार्ड बनाने के लिए 40 रुपए लगते थे।

प्रदेश भर में 55 लाख 62 हजार 290 कार्डधारी हैं। बीपीएल परिवारों के लिए केंद्र सरकार की राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना (आरएसबीवाई) जब लॉन्च हुई तो प्रदेश के एपीएल परिवार इससे छूट गए थे। उन तक पहुंचने राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना (एमएसबीवाई) शुरू की गई। 11.44 लाख परिवार इसका लाभ ले रहे हैं। इसी श्रेणी में नए 10 लाख परिवारों को जोडऩे की योजना तैयार की गई है।

3 माह के भीतर बनेंगे नए कार्ड्स
कंपनी से अनुबंध की शर्तों के मुताबिक प्रदेश भर में हजारों कैंप लगा कर 10 लाख से ज्यादा नए कार्ड बनाए जाएंगे। यह कार्य खुद बीमा कंपनी ही करेगी। इसके अलावा आधार कार्ड के बिना स्मार्ट को नहीं बनाया जाएगा।

सरकारी कर्मचारी हो सकते है दायरे से बाहर
विभागीय सूत्रों का कहना है कि एमएसबीवाई कार्डधारी अभी तकरीबन 11.44 लाख परिवार हैं। 10 लाख नए कार्ड बनने से यह श्रेणी बढकर २२ लाख के करीब हो जाएगी। एेसे में शासन पर करोड़ों का अतिरिक्त भार बढेगा। शासन इस संबंध में विचार कर रहा है कि शासकीय कर्मचारियों को एमएसबीवाई की सुविधा अलग किया जाए।

एमएसबीवाई के लाभार्थी यदि कम होते हैं तो उसकी बची राशि आरएसबीवाई में इस्तेमाल की जा सकती है। इससे सरकार पर पडऩे वाला बोझ कम होगा। आईएमए ने यह सुझाव दिया था। इसके लिए स्वास्थ्य आयुक्त ने शासन को प्रस्ताव भी भेजा था। हालांकि इस पर अब तक फैसला नहीं हो पाया है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव रानू साहू ने कहा कि शासकीय कर्मचारियों के मामले पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है। कार्ड बनाने की राशि में नाम मात्र का इजाफा किया गया है।