
दिनेश यदु. छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग के कार्यालय रायपुर ( Raipur News ) में महिला उत्पीड़न से संबंधित मामलों पर सुनवाई की। आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक की अध्यक्षता सुनवाई में आयों दोनों पक्षों को विस्तार से सुनकर मामलों का समाधान किया गया।
Raipur News: मामले में एक महिला ने अपने पूर्व पति की मृत्यु के बाद बीमा क्लेम के रूप में 2 लाख रुपये की राशि प्राप्त की थी। यह बीमा राशि उनके पूर्व पति के बीमा पॉलिसी के तहत मिली थी। महिला ने इस राशि का उपयोग अपनी जरूरतों के लिए किया और अपने पूर्व सास-ससुर को इस राशि में से कोई हिस्सा नहीं दिया। अब महिला ने अपने पूर्व सास-ससुर के खिलाफ आयोग में शिकायत दर्ज करवाई है।
महिला का कहना है कि उसके पूर्व पति के माता-पिता को उसके बच्चों के लिए हिस्सा देना चाहिए। महिला ने यह दावा किया कि पूर्व सास-ससुर बच्चों के हक को नज़रअंदाज कर रहे हैं और उन्हें वित्तीय सहायता देने से इंकार कर रहे हैं। आयोग ने इस मामले की गहराई से जांच की और पाया कि महिला ने बीमा राशि प्राप्त करने के बाद अपने पूर्व सास-ससुर को हिस्सा देने से इंकार कर दिया था। महिला आयोग ने यह समझा कि यह शिकायत केवल पूर्व सास-ससुर को परेशान करने के इरादे से दर्ज की गई थी।
एक महिला ने आरोप लगाया था कि उसके पति के सहकर्मी उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं। उसने आयोग से आग्रह किया कि इस मामले की जांच की जाए और उसके पति को न्याय दिलाया जाए। महिला ने यह शिकायत दर्ज कराते समय कई सबूत और दस्तावेज भी प्रस्तुत किए थे, जिसमें अनुसूचित जाति आयोग के दस्तावेज भी शामिल थे। आयोग ने इस मामले की गहराई से जांच की और पाया कि महिला द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेज झूठे थे।
अनुसूचित जाति आयोग के दस्तावेजों के आधार पर यह साबित हुआ कि महिला की शिकायत में कोई सच्चाई नहीं थी। आयोग ने पाया कि महिला ने अपने पति की नौकरी बचाने के लिए यह झूठी शिकायत दर्ज कराई थी। डॉ. किरणमयी नायक ने महिला को समझाया कि झूठी शिकायतें न केवल न्याय प्रणाली का दुरुपयोग हैं, बल्कि इससे वास्तविक पीड़ितों के मामलों में भी संदेह पैदा होता है। आयोग ने महिला को सचेत किया कि इस प्रकार की झूठी शिकायतों से बचना चाहिए और सच्चाई के साथ न्याय का पालन करना चाहिए।
एक दंपत्ति के बीच गंभीर विवाद चल रहा था। उनकी शादीशुदा जिंदगी में आए तनाव के कारण दोनों के बीच लगातार झगड़े हो रहे थे। दंपत्ति का एक बच्चा भी है, जिसे इन झगड़ों से काफी प्रभावित हो रहा था। महिला ने अपने पति के खिलाफ आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें उसने अपने पति पर मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न का आरोप लगाया था। डॉ. किरणमयी नायक ने दोनों पक्षों को सुनवाई के लिए बुलाया और दोनों की समस्याओं को विस्तार से सुना।
पति ने अपनी पत्नी के साथ सुलह करने की इच्छा व्यक्त की और कहा कि वह अपनी गलतियों को सुधारने के लिए तैयार है। महिला ने भी अपने बच्चे के भविष्य को ध्यान में रखते हुए सुलह का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। आयोग की समझाइश पर, पति ने अपनी पत्नी को वापस घर ले जाने का निर्णय लिया। इस निर्णय के साथ, आयोग की काउंसलर ने अगले एक साल तक इस मामले की निगरानी करने का निर्देश दिया। काउंसलर नियमित रूप से दंपत्ति से संपर्क में रहेंगी और यह सुनिश्चित करेंगी कि उनके बीच कोई नया विवाद न उत्पन्न हो। इसके अलावा, किसी भी समस्या के समाधान के लिए काउंसलर तत्काल हस्तक्षेप करेंगी।
महिला ने अपनी दिव्यांगता का आधार बनाकर शासकीय नौकरी में लापरवाही की थी। महिला पर आरोप था कि वह अपनी तीन पहिया गाड़ी को ओपीडी के सामने खड़ा करके शासकीय कार्यों में शामिल होती थी और अपनी जिम्मेदारियों को ठीक से नहीं निभाती थी। विभागीय जांच में यह साबित हो गया कि महिला ने अपनी दिव्यांगता का दुरुपयोग किया और अपनी नौकरी में लापरवाही बरती। आयोग ने मामले की जांच करने के बाद महिला को समझाया कि दिव्यांगता का दुरुपयोग नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने महिला को यह भी समझाया कि शासकीय नौकरी में ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ काम करना आवश्यक है। इस मामले में, महिला को विभागीय जांच के आधार पर स्थानांतरित कर दिया गया था।
मामले में एक महिला ने शिकायत की कि उसने HDFC बैंक से कोई लोन नहीं लिया था, फिर भी उसके खाते से 1,25,000 रुपये का लोन लिया गया था। महिला ने बताया कि मई 2023 में अपनी बेटी की शादी के लिए उसने लोन का आवेदन किया था, तब उसे पता चला कि उसके खाते से पहले ही लोन लिया जा चुका है। इस मामले में महिला को मौखिक रूप से यह जानकारी दी गई थी और उसे कोई दस्तावेज नहीं प्रदान किया गया था।
सुनवाई के दौरान, HDFC बैंक की ओर से लिगल मैनेजर उपस्थित हुए। उन्होंने कहा कि इस प्रकरण की जानकारी ब्रांच मैनेजर ही दे सकते हैं। आयोग ने बैंक के ब्रांच मैनेजर को अगली सुनवाई में उपस्थित होने का निर्देश दिया ताकि मामले का समाधान किया जा सके। डॉ. किरणमयी नायक ने महिला की शिकायत को गंभीरता से लिया और बैंक के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे इस मामले की पूरी जांच करें और सच्चाई सामने लाएं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की वित्तीय धोखाधड़ी किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है और पीड़ित को न्याय मिलना चाहिए।
Updated on:
12 Jul 2024 06:34 am
Published on:
11 Jul 2024 06:37 pm
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