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मेरी पत्नी की रक्षा करेंगे बस्तर के नेकदिल लोग : ज्यां द्रेज

सामाजिक कार्यकर्ता बेला भाटिया पर बस्तर छोडऩे का दबाव बना रहे हैं, लेकिन उनके पति को आम बस्तरवासी पर भरोसा है।

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Ashish Gupta

Mar 28, 2016

People of Bastar

People of Bastar will protect my wife: Jean Dreze

रायपुर.
सामाजिक कार्यकर्ता बेला भाटिया के पति और अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज का कहना है कि भले ही कुछ लोग उनकी पत्नी पर बस्तर छोडऩे का दबाव बना रहे हैं, लेकिन उन्हें आम बस्तरवासी पर भरोसा है। एक दिन पहले सामाजिक एकता मंच और उससे जुड़े संगठनों के कार्यकर्ताओं ने बेला भाटिया के घर के बाहर प्रदर्शन किया और उनके मकान मालिक तथा गांव वालों पर उन्हें निकालने का दबाव बनाया। प्रदर्शनकारियों ने घर पर पर्चे भी फेंके। इसमें बेला को माओवादी और ज्यां द्रेज को विदेशी दलाल करार दिया गया। रांची में रह रहे द्रेज ने पत्रिका को पत्र भेज कर अपनी स्थिति के बारे में बताया। प्रस्तुत हैं उनके पत्र के प्रमुख अंश-



जो कोई बेला भाटिया और मुझे माओवादी मानता है, वह निश्चित ही सच्चाई से कोसों दूर है। बेला इन आरोपों को पहले ही खारिज करते हुए अपने काम के बारे में स्पष्ट कर चुकी हैं। मेरे खुद के विचार और काम भी एक खुली किताब की तरह हैं। प्रदर्शनकारियों ने इनको जानने की जहमत उठाई होती तो वे आरोप लगाने की नादानी नहीं करते। मैं रांची विश्वविद्यालय और दिल्ली स्कूल ऑफ इकॉनॉमिक्स से जुड़ा हूं। विकासपरक मुद्दों पर सक्रिय अर्थशास्त्री हूं। रांची में रहता हूं और समय-समय पर बेला से मिलने बस्तर आता हूं। मेरा ज्यादातर काम भुखमरी, गरीबी, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा सामाजिक नीति के अन्य पहलुओं पर है। अर्थशास्त्र के लिए नोबल पुरस्कार से सम्मानित अमत्र्य सेन का मैं घनिष्ठ सहकर्मी हूं। अगर मैं माओवादी हूं तो फिर छत्तीसगढ़ विशेष जन सुरक्षा कानून के तहत अमत्र्य सेन को भी जेल भेज देना चाहिए।


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मैं सशस्त्र संघर्ष का समर्थन नहीं करता। लेकिन लोकतांत्रिक साधनों से अन्याय के सभी रूपों के प्रतिरोध का समर्थक हूं। बचपन में युद्ध की भयावहता सुनी थी तभी से मैं शांति समर्थक कार्यकर्ता हूं। मैं ना तो माओवादी हिंसा का समर्थन करता हूं और ना ही राज्यसत्ता प्रयोजित हिंसा का। माओवादी हिंसा में मैंने अपने मित्र को गवांया है। झारखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ लडऩे वाले मेरे साहसी मित्र नियामत अंसारी को माओवादी दस्ते ने कुछ साल पहले बेरहमी से मार डाला था।


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शनिवार को छोड़े गए पर्चे में मुझे विदेशी दलाल बताया गया है। सच्चाई यह है कि मैं भारतीय नागरिक हूं और कल जो लोग यह पर्चा बांट रहे थे, उनमें से कइयों की तुलना में मैंने भारत में कहीं ज्यादा वक्त बिताया है। मैं इस देश से प्यार करता हूं और कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक मेरे मित्र हैं। कल के दिन के अलावा भारत में सैंतीस सालों से रहते हुए

मुझे कभी शत्रुतापूर्ण बरताव का सामना नहीं करना पड़ा है।


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शनिवार का प्रदर्शन धमकाने का आपराधिक कृत्य है। बस्तर जैसी जगह में किसी को माओवादी कहना उसकी जान खतरे में डालने के बराबर है। माओवादियों से नफरत करने वाला कोई भी व्यक्ति इस आरोप के आधार पर बेला को नुकसान पहुंचा सकता है। माओवादी होने का आरोप एक बहाना भर है। बेला को परेशान करने की असली वजह यह है कि उसने कुछ हफ्ते पहले सुरक्षाबल के कुछ सदस्यों के खिलाफ बलात्कार और यौन हिंसा की शिकायत दर्ज कराने में बीजापुर जिले की कुछ आदिवासी महिलाओं की मदद की थी। इसके बाद से ही पुलिस प्रायोजित सामाजिक एकता मंच जैसे समूहों ने बेला को निशाना बनाना शुरु कर दिया। मुझे विश्वास है कि बस्तर के नेकदिल लोग बेला की सुरक्षा में मदद करेंगे।

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