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गेट में रायपुर के सिद्धेश को एआईआर 33, जानिए स्ट्रैटेजी

आईआईटी बांबे से किया है बीटेक

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गेट में रायपुर के सिद्धेश को एआईआर 33

गेट में रायपुर के सिद्धेश को एआईआर 33

कमल विहार सेक्टर 6 निवासी सिद्धेश पांडे ने ग्रेजुएट एप्टीट््यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग (गेट) में एआईआर ३३ (मैकेनिकल इंजीनियरिंग) हासिल की है। उन्होंने आईआईटी बांबे से ग्रेजुएशन किया है। सिद्धेश ने पत्रिका से बातचीत में बताया, मुझे क्या करना है यह मैं पहले ही तय कर लेता हूं। मैंने टेंथ में डिसाइड कर लिया था कि जेईई क्रैक करना है। 12वीं में तय कर लिया था कि मैकेनिकल इंजीनियरिंग करनी है। जब मैंने आईआईटी बांबे ज्वाइन किया तो पहले ही सेमेस्टर में तय कर लिया था कि पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग (पीएसयू) में जाना है। पीएसयू में न सिर्फ सैलरी अच्छी होती है, बल्कि वर्कलाइफ बैलेंस भी अच्छा रहता है। स्टेबिलिटी बनी रहती है और ज्यादा प्रेशर भी नहीं रहता। मेरी रैंकिंग के हिसाब से किसी भी महारत्न पीएसयू में मेरी जॉब की संभावना अधिक है। सिद्धेश के पापा प्रशांत पांडे एलआईसी में कार्यरत हैं जबकि मॉम डॉ. स्वाति पांडे होम मेकर हैं।

इसलिए देते हैं गेट

गेट देने के दो खास वजहें होती हैं। पहला यह कि इसके जरिए आप आईआईटी मेंं एमटेक कर सकते हैं। दूसरा यह कि आप पीएसयू ज्वाइन कर सकते हैं। जेईई एडवांस दो बार ही दिया जा सकता है, अगर आप क्रैक नहीं कर पाए तो गेट के थ्रू किसी भी आईआईटी से एमटेक कर आईआईटियन का टैग हासिल कर सकते हैं। इसके अलावा कुछ और कंपनियां हैं जो अपनी रिक्रूटमेंट गेट से करती हैं। इस साल २९ विषय पर गेट हुआ था। सिद्धेश ने बताया, हर साल मैकेनिकल में गेट देने वालों की संख्या 80 से 90 हजार होती है। इसे देने की कोई एज लिमिट नहीं है, लेकिन ग्रेजुएशन जरूरी है।

ऐसे की तैयारी

आईआईटी के थर्ड ईयर के एंड में मैंने तेजी से तैयारी शुरू की। गेट में वही पूछा जाता है जो आपने तीन साल तक आईआईटी में पढ़ा। अगर उसको अच्छे से पढ़ा जाए तो ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती। मैंने नोट्स बनाने शुरू किए। कॉलेज खत्म होते तक नोट्स भी पूरे हो गए। नोट्स बनाते हुए मैंने पिछले कई साल के क्वेश्चन पेपर सॉल्व किए।