रमा दत्त ने कहा, संस्कृति संचालनालय में जमीन से जुडे़ कलाकारों की कोई पहचान नहीं है, लेकिन इवेंट कंपनियों के नुमाइंदे और विभाग के अधिकारियों से अंदरुनी संबंध रखने वाले कथित कलाकार यहां साहब की तरह आसन लगाए बैठे रहते हैं। रमा दत्त ने यह भी कहा कि कई बार यह अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है कि यहां के अधिकारी कौन हैं और इवेंट कंपनी वाले कौन हैं? ये वही इवेंट कंपनियां हैं, जिन्हें बड़ी रकम में कार्यक्रम आवंटित किया जाता है, जबकि स्थानीय कलाकारों को चंद रुपयों में कई कार्यक्रम करने कहा जाता है। रमा दत्त जोशी ने कहा कि यह सच है कि संख्या की दृष्टि से प्रदेश के सभी क्षेत्र के कलाकारों को कार्यक्रम मिलता है, लेकिन उन्हें दिए जाने वाले भुगतान की राशि देखकर कोई भी अंदाजा लगा सकता है कि मनमौजी किस तरह चल रही है।