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संस्कृति विभाग में कलाकारों की अहमियत नहीं

अधिकारी इवेंट कंपनियों के जरिए कार्यक्रम कराकर उन्हें उपकृत कर रहे

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Chandu Nirmalkar

Aug 26, 2016

culture actors

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रायपुर .
लोक कलाकार स्व. गंगाराम सिवारे की पत्नी सोनी बाई की तंगहाली में मौत के बाद लोक कलाकार रमादत्त जोशी ने संस्कृति विभाग के अधिकारियों पर बेहद तीखे आरोप लगाए हैं। जोशी ने कहा है कि अधिकारी इवेंट कंपनियों के जरिए कार्यक्रम कराकर उन्हें उपकृत कर रहे हैं।


अब आंदोलन ही एकमात्र रास्ता

लोक कलाकार रमादत्त जोशी ने कहा, कि संस्कृति विभाग के कुछ अधिकारियों की मनमानी और कलाकारों की उपेक्षा की शिकायत डायरेक्टर से लेकर मंत्री तक कई बार करने के बावजूद न तो यहां की स्थिति में सुधार हुआ न वास्तविक कलाकारों को उनका हित मिला। सालों से यहां जमे अफसर और कर्मचारियों की मनमानी से आला अधिकारी भी आंख फेर चुके हैं। ऐसे में आंदोलन ही एकमात्र उपाय बच गया है। रमा दत्त ने कहा कि गांव-गांव के कलाकारों को साथ लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन करेंगे।


साहब की तरह बैठे रहते हैं ठेकेदार


रमा दत्त ने कहा, संस्कृति संचालनालय में जमीन से जुडे़ कलाकारों की कोई पहचान नहीं है, लेकिन इवेंट कंपनियों के नुमाइंदे और विभाग के अधिकारियों से अंदरुनी संबंध रखने वाले कथित कलाकार यहां साहब की तरह आसन लगाए बैठे रहते हैं। रमा दत्त ने यह भी कहा कि कई बार यह अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है कि यहां के अधिकारी कौन हैं और इवेंट कंपनी वाले कौन हैं? ये वही इवेंट कंपनियां हैं, जिन्हें बड़ी रकम में कार्यक्रम आवंटित किया जाता है, जबकि स्थानीय कलाकारों को चंद रुपयों में कई कार्यक्रम करने कहा जाता है। रमा दत्त जोशी ने कहा कि यह सच है कि संख्या की दृष्टि से प्रदेश के सभी क्षेत्र के कलाकारों को कार्यक्रम मिलता है, लेकिन उन्हें दिए जाने वाले भुगतान की राशि देखकर कोई भी अंदाजा लगा सकता है कि मनमौजी किस तरह चल रही है।


काश, सीएम जान लेते इनकी करतूत

जोशी ने कहा, कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से मिलकर यहां की पूरी कहानी बताने की कई बार कोशिश की गई, लेकिन उनसे मुलाकात नहीं हो सकी। उन्होंने कहा, अगर मुख्यमंत्री की जानकारी में यह सारी बातें आएंगी, तो अधिकारियों की मनमौजी खत्म हो जाएगी और ठेकेदारों का दुकान चलना बंद हो जाएगा।


सोनी बाई के अंतिम संस्कार में नहीं पहुंचे संगठन

स्व. गंगाराम सिवारे की पत्नी सोनी बाई सिवारे जीवन के आखिरी समय में सरकारी प्रक्रिया की शिकार तो हुई ही, कलाकारों के हित करने का दावा करने वाले संगठनों की उपेक्षा का भी शिकार हुई। उनके जीवित रहते हुए सहयोग करने वाले लोगों की गिनती उंगलियों में है। निधन के बाद उनके परिजनों को ढांढस बंधाने तक की जरूरत तमाम कला संगठनों ने नहीं समझी। गौरतलब है सोनी सिवारे का अंतिम संस्कार बोरिया में किया गया, जहां उनके पारिवारिक सदस्य और रिश्तेदार मौजूद थे।


डायरेक्टर राकेश चतुर्वेदी ने बताया कि संस्कृति विभाग हाल के दिनों में स्थानीय कलाकारों के लिए कई स्तर पर काम कर रहा है। सोनी बाई सिवारे को आर्थिक मदद देने के लिए विभाग ने देरी नहीं की, बल्कि उन्होंने ही दस्तावेज विलंब से पेश किया। अब उनके परिजनों को आर्थिक सहयोग दिया जाएगा। जहां तक अन्य कलाकारों को पारिश्रमिक या सम्मान राशि के निर्धारण की बात है, तो इसकी प्रक्रिया बहुत तेजी से जारी है।