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Raipur: निगम के 1600 करोड़ के बजट का अनुमान, पिछले बजट के कई वादे अधूरे

महापौर मीनल चौबे के पिछले साल के बजट प्रस्ताव के आंकलन से यह ये तस्वीर साफ है कि न तो वार्डों के मास्टर प्लान पर काम हुआ न ही नाले-नालियां ढंकी गई। वहीं महापौर के पिछले साल के बजट पिटारे में शहर के लोगों से कई वादे किए थे, परंतु अधिकांश जमीं पर नहीं उतरे। […]

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Raipur: निगम के1600 करोड़ के बजट का अनुमान, पिछले बजट के कई वादे अधूरे

Raipur: निगम के1600 करोड़ के बजट का अनुमान, पिछले बजट के कई वादे अधूरे

महापौर मीनल चौबे के पिछले साल के बजट प्रस्ताव के आंकलन से यह ये तस्वीर साफ है कि न तो वार्डों के मास्टर प्लान पर काम हुआ न ही नाले-नालियां ढंकी गई। वहीं महापौर के पिछले साल के बजट पिटारे में शहर के लोगों से कई वादे किए थे, परंतु अधिकांश जमीं पर नहीं उतरे। काजीकाजी महिलाओं को राजधानी में रहने के लिए वुमन हास्पिटल का निर्माण भी चल रहा है, लेकिन, मूलभूत सुविधाओं और सरोवर धरोहर जैसे मसलों पर जो वादे किए थे, वैसी सुविधाएं शहर के लोगों को नहीं मिली।

राजस्व बढ़ाने के प्लान पर कोई ठोस काम नहीं

महापौर मीनल चौबे अपने दूसरे बजट की तैयारी में लगी हैं। 30 मार्च को निगम के सदन में वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश करेंगी। माना जा रहा है कि पिछले साल जैसा ही लगभग 1600 करोड़ के बजट का अनुमान है, क्योंकि एक साल के दौरान निगम का राजस्व बढ़ाने के प्लान पर कोई ठोस काम नहीं हुआ। इसलिए निगम का बजट बढ़ने की संभावना कम है। ऐसे में शहर के लोगाें को मच्छरों के डंक से राहत नहीं मिल पाई है। पेयजल समस्या बरकरार है। तीन साल से फुंडहर, लाभांडी क्षेत्र में पानी टंकी बनकर तैयार है, लेकिन उसमें पाइप लाइन बिछाने का काम नहीं हुआ। नतीजा लोग बोर का पानी पीने को मजबूर हैं। उन्होंने फिल्टर प्लांट से नलों में पानी नहीं मिल पाया। हालांकि कुछ वादों में महापौर मीनल चौबे जरूर खरी उतरी हैं। जैसे नालंदा टू लाइब्रेरी, दलदल सिवनी में लाइब्रेरी निर्माण कराना शुरू हुआ।

बजट सामान्य सभा में ज्यादातर एजेंडे नामकरण

इस बार के बजट सामान्य सभा के लिए 17 एजेंडे तय किए है, लेकिन उनमें से ज्यादातर नामकरण और महापुरुषों की प्रतिमाएं लगाने से संबंधित है। निगम का राजस्व बढ़ाने और बुनियादी सुविधाएं बढ़ने जैसे एजेंडे कम हैं। शहर को राजधानी के अनुरूप विकसित करने के जो सपने दिखाए गए थे, वैसी तस्वीरें सामने नहीं आई। सड़कों से बाजारों को व्यवस्थित करने और वेंडर जोन जैसे प्लान पर काम नहीं होने से सूरत में कोई बदलाव नहीं हुआ।

ये वादे पिटारे से बाहर नहीं निकले

-शहर की पहचान ऐतिहासिक तालाबों से है। महापौर ने अपने पहले बजट में कहा था कि तालाबों को हम सुंदर बनाएंगे। मशीनों से जलकुंभी मुक्त कराएंगे।
-गीले कचरे से कम्पोस्ड बायोगैस (सीबीजी) बनाने का कार्य शुरू होगा, लेकिन रावांभाठा में केवल जमीन देखी गई।

  • नगर निगम में महिला कर्मचारियों और बाहर से बच्चों को लेकर आने वाली महिलाओं के लिए बेबी फीडिंग जोन बनाने का वादा था, उस पर कोई काम नहीं हुआ।
  • मच्छरों के प्रकोप से राजधानीवासी परेशान हैं, वादा था कि खुली नालियों को ढकने की कार्य योजना पर कार्य होगा, लेकिन मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ा।
  • पेयजल व्यवस्था को दुरुस्त करने का वादा था। इसके विपरीत पिछले साल के अपेक्षा दोगुना डेढ़ करोड़ का टेंडर टैंकरों से जलापूर्ति के लिए फाइनल किया जा रहा है।
  • ई-सिटी बसों का अता-पता नहीं है। जिसे शहर के हर मार्ग में सस्ती शहरी यातायात सुविधा मुहैया कराने का वादा किया गया था। जरवाय में डिपो बनाने का काम जरूर शुरू हुआ है।