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‘दंगल’ से अभिभावकों की बदली सोच! ओलंपियन पहलवान गीता फोगाट नेे रायपुुर में कहा- छोरियां अब छोरों से कम नहीं…

Geeta Phogat Raipur visit: भारत में मौजूदा समय में बालिकाएं तेजी से खेलों सेे जुड़ रही हैैं। अभिभावकों की सोच में यह परिवर्तन दंगल फिल्म के बाद आई है।

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‘दंगल’ से अभिभावकों की बदली सोच! ओलंपियन पहलवान गीता फोगाट नेे रायपुुर में कहा- छोरियां अब छोरों से कम नहीं...(photo-patrika)

‘दंगल’ से अभिभावकों की बदली सोच! ओलंपियन पहलवान गीता फोगाट नेे रायपुुर में कहा- छोरियां अब छोरों से कम नहीं...(photo-patrika)

Geeta Phogat Raipur visit: भारत में मौजूदा समय में बालिकाएं तेजी से खेलों सेे जुड़ रही हैैं। अभिभावकों की सोच में यह परिवर्तन दंगल फिल्म के बाद आई है। महिलाएं आज के समय में ओलंपिक तक अपनेे देश का नाम रोशन कर रही हैं। यह कहना है दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स 2010 में भारत की स्वर्ण जीतने वाली पहलवान गीता फोगाट का।

Geeta Phogat Raipur visit: बेटियां भी खेल में दिखा रहीं दम

वह सरगुजा ओलंपिक में शामिल होने के लिए रायपुर आई थी। देश की पहली ओलंपिक क्वालीफाई करने वाली फोगाट नेे पत्रिका रिपोर्टर से खास बातचीत में कहा कि उनकी जीवनी पर बनी फिल्म दंगल ने महिलाओं को खेलों में आगे लानेे में अहम भूमिका निभाई है। लोगों की सोच बदली, अब बालिकाएं अन्य क्षेत्रों के साथ खेलों में भी तेजी से देश का गौरव बढ़ा रही हैं। पेश हैं उनसे खास बातचीत के प्रमुख अंश।

प्रश्न: खिलाडिय़ों का डाइट प्लान कैसा होना चाहिए, फूड सप्लिमेंट का उपयोग कितना सही है?

उत्तर: खिलाडिय़ों को सबसे पहले जंक फूड से दूरी बना लेनी चाहिए। घर पर बनीं चीजे खाएं। मिलेट््स की चीजें खाएं। फूड सप्लिमेंट का उपयोग कुछ हद तक जरूरी है क्योंकि खिलाडिय़ों का हार्डवर्क बहुत होता है। दाल-चावल से उसकी भरपाई नहीं हो सकती, लेकिन इसका रोल 4-5 प्रतिशत ही होता है। बाकी आपकी मेहनत और प्रोटीन डाइट ही आपको आगे लेकर जाती ह

प्रश्न: ओलंपिक में भारत अब भी पदक से चूक रहा है, क्या कारण हैं?

उत्तर: देश में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है। खिलाडिय़ों के एक्सपोजर के लिए टूर्नामेंट जीतने ज्यादा होंगे, तो हम उतना बेहतर कर पाएंगे। ज्यादा से ज्यादा टूर्नामेंट होने से खिलाडिय़ों को एक्सपोजर मिलेगा और हमारे पदक भी बढ़ेंगे। कई बार खिलाड़ी खेल को प्रेशर के रूप में ले लेते हैं, जिससे उनके प्रदर्शन प्रभावित होता है और पदक जीतने से चूूक जाते हैैं। मैं भी कॉमनवेल्थ गेम्स 2010 में एक टाइम पर प्रेशर में आ गई थी, लेकिन खुुद को संभाला और पदक जीता। मीडिया और लोगों की उम्मीदों का बोझ का बड़ा प्रभाव होता है।

प्रश्न: आपके पदक जीतनेे के बाद परिवार और खेल में क्या-क्या परिवर्तन देखा है?

उत्तर: पहले साल में एक या दो बड़े टूर्नामेंट होते थे। जैसे एशियन या वल्र्ड चैम्पियनशिप, लेकिन अब परिवार पूरा सपोर्ट करता है। कुश्ती में कॉमनवेल्थ गेम्स में पदक आनेे के बाद सरकार का भी नजरिया खेलों को लेकर बदला है। अब सरकार खिलाडिय़ों को एक्सपोजर टूर का खर्चा उठाती है। साथ ही जगह-जगह कैंप लगाए जाते हैं। हमारे देश के खिलाड़ी दूसरे देशों में जाकर अन्य खिलाडिय़ों से मिलते हैं। नौकरी भी मिल रही है, जिससे उनका मनोबल बढ़ा है।

प्रश्न: भारतीय खिलाडिय़ों को मानसिक रूप से मजबूती के लिए क्या प्रयास किए जाएं?

उत्तर: पहले केवल कोच टूर्नामेंट के दौरान टीम के साथ रहते थे, लेकिन अब तो मनोचिकित्सक भी टीमों के साथ रहते हैं। मेडिटेशन और अन्य तरीकों से वे खिलाडिय़ों को ज्यादा मानसिक रूप से मजबूत बनाया जा सकता है। इससे खिलाडिय़ों के प्रदर्शन में प्रभाव देखनेे को मिलेगा। मानसिक दबाव झेलने की क्षमता बढ़ेगी।