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SIR News: दस्तावेज में मामूली गड़बड़ी तो नाम गायब! वोटर लिस्ट में जुड़ना हुआ मुश्किल, तकनीकी खामियों से परेशान लोग…

SIR News: रायपुर में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं की अंतिम सूची जारी कर दी है, लेकिन आम मतदाताओं को सूची में अपना नाम खोजने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

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SIR News: दस्तावेज में मामूली गड़बड़ी तो नाम गायब! वोटर लिस्ट में जुड़ना हुआ मुश्किल, तकनीकी खामियों से परेशान लोग...(photo-patrika)

SIR News: दस्तावेज में मामूली गड़बड़ी तो नाम गायब! वोटर लिस्ट में जुड़ना हुआ मुश्किल, तकनीकी खामियों से परेशान लोग...(photo-patrika)

SIR News: छत्तीसगढ़ के रायपुर में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं की अंतिम सूची जारी कर दी है, लेकिन आम मतदाताओं को सूची में अपना नाम खोजने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय आम नागरिकों को जिस वेबसाइट और ऐप के जरिए अपना नाम देख लेने की सुविधा का दावा कर रहा है।

SIR News: सत्यापन नहीं कर पा रहे वोटर

दरअसल दोनों माध्यम तकनीकी त्रुटि की ऐसी भेंट चढ़ चुके हैं कि एक आम मतदाता सिर फोड़ डालेगा, लेकिन उसे वह सूची ही नहीं मिलेगी, जिसमें नाम होगा। नए मतदाता के रूप में नाम जोड़वाने की प्रक्रिया इतनी जटिल और कठिन है कि आधार कार्ड या अन्य पहचान दस्तावेज में मामूली भिन्नता रही तो नाम नहीं जुड़ पाएगा। हैरानी की बात यह कि सीईओ कार्यालय इसके लिए अपने कम्प्यूटर प्रोग्रामर पर निर्भर है, जो अभी तीर्थयात्रा पर हैं।

जारी अधिकृत जानकारी में आम नागरिकों के लिए पांच विकल्प बताए गए थे, जिनके माध्यम से अपने नाम मतदाता सूची में खोजे जा सकते हैं। इसमें पहला, सीईओ छत्तीसगढ़ की वेबसाइट दूसरा केन्द्रीय चुनाव आयोग की वेबसाइट तीसरा मोबाइल ऐप, चौथा बीएलओ के माध्यम से और पांचवां जिला निर्वाचन कार्यालय यानी कलेक्टर ऑफिस। इनमें से पांचवां और अंतिम विकल्प केवल जिला मुख्यालय में ही उपलब्ध है, जहां

विकल्प और उनसे जुड़ी दिक्कतें

  1. पहला, सीईओ छत्तीसगढ़ की वेबसाइट: इसके होमपेज पर विशेष गहन पुनरीक्षण 2026 अंतिम प्रकाशित नामावली, 21-02-2026 का मेनु जरूर है, लेकिन इस पर क्लिक करके आगे बढऩे पर कैप्चा कोड से आगे प्रोसेस नहीं होता।
  2. दूसरा, केन्द्रीय चुनाव आयोग की वेबसाइट : इस वेबसाइट पर भी नाम सर्च करने की प्रक्रिया में ऊपर वाली वेबसाइट के ङ्क्षलक को री डायरेक्ट कर देता है, उसके बाद जो दिक्कत उसमें है, वहीं इसमें भी है। कैप्चा कोड से आगे नहीं बढ़ता।
  3. तीसरा मोबाइल ऐप : यह एप्प पुराने वर्जन के एंड्रॉइड में आसानी से काम नहीं कर रहा है। यदि ऐप ओपन हो भी गया तो कैप्चा कोड डालने के बाद बार-बार ऐप का अपडेशन मांगता है। यानी, आम मतदाता जो साधारण तकनीकी ज्ञान के साथ मोबाइल यूज करता है, उसके वश से यह बाहर है।
  4. चौथा बीएलओ के माध्यम से : ज्यादातर बीएलओ एसआईआर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अपने मूल कार्य पर लौट चुके हैं। नाम सत्यापन के दौरान जिस तरह वे गंभीर थे, ज्यादातर की दिलचस्पी अब नहीं है। वे अब घर-घर जाकर यह नहीं बताएंगे, कि उनके क्षेत्र में किस-किस के नाम कट गए और क्यों कट गए।

मुख्य बातें: एक नजर में

  • 18730914 एसआईआर के बाद कुल पंजीकृत
  • 234994 मतदाताओं की वृद्धि दर्ज
  • 27196 बीएलओ की लगाई गई थी ड्यूटी
  • 27 अक्टूबर से शुरू हुआ था एसआईआर
  • 33 जिलों में हुई थी यह प्रक्रिया
  • 21 फरवरी को हुआ नामावली का अंतिम प्रकाशन

सिर्फ नाम खोजने के लिए पहुंच पाना दूर-दराज के मतदाताओं के लिए संभव नहीं है। नहीं जुड़ पा रहे नए मतदाता: नए मतदाताओं के नाम जोडऩे के लिए ऑनलाइन माध्यम से फॉर्म-6 भरने का विकल्प वेबसाइट में दिया गया है, लेकिन उस पर क्लिक करते ही उसमें रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर या एपिक नंबर मांगा जा रहा है। सोचने की बात है कि जो नए मतदाता हैं, उनके पास एपिक नंबर या रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर कहां से होगा।

संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी पीएस ध्रुव ने कहा की नए मतदाताओं के नाम लगातार जुड़ते जा रहे हैं। ऑनलाइन सारे आंकड़े देखे जा सकते हैं। यदि किसी तकनीकी त्रुटि के कारण नाम सर्च करने में समस्या आ रही है, इस संबंध में हमारे प्रोग्रामर बता पाएंगे, जो इस समय तीर्थयात्रा पर गए हैं। दो दिन बाद
आ जाइए।