वहां के लोगों ने मुझसे कहा, सर आप सरकार तक हमारी बात पहुंचाओ वरना हम माओवादी बन जाएंगे। तब मुझे लगा कि माओवाद को समझने के लिए पूरी तरह उन पर केन्द्रित फिल्म बननी चाहिए। मैं उस फिल्म का हिस्सा जरूर बनूंगा। क्योंकि मैं एक्टिविस्ट नहीं, एक्टर हूं और सिर्फ फिल्म के जरिए ही सरकार तक अपनी बात पहुंचा सकता हूं। ये बातें पत्रिका ऑफिस पहुंचे अपनी संजीदा अदाकारी से बॉलीवुड में अलग पहचान बनाने वाले अभय देओल ने खास बातचीत में कहीं।