
रीजनिंग गुरु योगेन्द्र साहू को खान सर ने किया समान्नित (Photo Patrika)
Raipur News: रायपुर के ग्राम सेमरिया के प्रतिभाशाली युवा योगेन्द्र साहू को उनके उत्कृष्ट शिक्षण कार्य के लिए देश के प्रसिद्ध शिक्षाविद् खान सर द्वारा सम्मानित किया गया है। प्रयागराज में आयोजित इस कार्यक्रम में उन्हें रीजनिंग विषय में उनकी विशेष दक्षता और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करा रहे विद्यार्थियों के मार्गदर्शन हेतु यह सम्मान प्रदान किया गया, जिससे पूरे क्षेत्र में गौरव का माहौल है। योगेन्द्र साहू वर्तमान में खान ग्लोबल स्टडीज़ में रीजनिंग गुरु के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
यह सम्मान न केवल उनकी कड़ी मेहनत और प्रतिभा का प्रतीक है, बल्कि ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने की प्रेरणादायक कहानी भी प्रस्तुत करता है। कार्यक्रम में देशभर से आए शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच योगेन्द्र साहू को उनके उत्कृष्ट शिक्षण कार्य और विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करने में योगदान के लिए सराहा गया।
आमतौर पर गुलाब को प्यार और सौंदर्य का प्रतीक माना जाता है, लेकिन सूरजपुर जिले के एक किसान ने इसे अपनी सफलता का आधार बना दिया है। ग्राम डुमरिया निवासी किसान भोला प्रसाद अग्रवाल ने गुलाब की आधुनिक खेती अपनाकर न केवल अपनी आय बढ़ाई है, बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं।
वर्ष 2023 में उन्होंने पारंपरिक खेती से हटकर उन्नत तकनीक की ओर कदम बढ़ाया। करीब 2 एकड़ भूमि में उन्होंने दो अत्याधुनिक पॉलीहाउस स्थापित किए। इस परियोजना पर लगभग 1 करोड़ 20 लाख रुपये की लागत आई, जिसमें 90 लाख रुपये बैंक ऋण, 30 लाख रुपये स्वयं की पूंजी और राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड से 50 प्रतिशत अनुदान शामिल है।
इन पॉलीहाउस में डच किस्म के करीब 80 हजार गुलाब पौधे लगाए गए हैं। नियंत्रित तापमान और वैज्ञानिक पोषण प्रबंधन के कारण यहां सालभर उत्पादन होता है। वर्तमान में इस फार्म से प्रतिदिन औसतन 3 से 4 हजार गुलाब स्टिक का उत्पादन हो रहा है। तैयार फूलों की आपूर्ति बनारस, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के विभिन्न बाजारों में की जाती है।
इस आधुनिक खेती से भोला प्रसाद अग्रवाल को हर माह औसतन 2 से 3 लाख रुपये की आय हो रही है। श्रमिकों के खर्च, खाद, उर्वरक और रखरखाव लागत निकालने के बाद भी यह खेती बेहद लाभकारी साबित हो रही है और नियमित आमदनी का मजबूत जरिया बन चुकी है। श्री अग्रवाल बताते हैं कि पारंपरिक खेती पूरी तरह मौसम पर निर्भर रहती है, जिससे जोखिम अधिक होता है। वहीं पॉलीहाउस तकनीक ने इस जोखिम को काफी हद तक कम कर दिया है। नियंत्रित वातावरण में उगाए गए फूलों की गुणवत्ता बेहतर होती है, जिससे बाजार में अच्छे दाम मिलते हैं।
वह कहते हैं कि यदि नई तकनीक अपनाई जाए और शासन की योजनाओं का लाभ लिया जाए, तो खेती को भी उद्योग की तरह सफल बनाया जा सकता है। आज उनकी पहल न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही है, बल्कि आसपास के लोगों को रोजगार भी उपलब्ध करा रही है। सूरजपुर में गुलाब की खेती का आधुनिक मॉडल यह साबित करता है कि सही योजना, आधुनिक तकनीक और मेहनत के साथ खेती भी लाभ का सशक्त माध्यम बन सकती है। गुलाब की खुशबू के साथ सफलता की यह कहानी अब पूरे क्षेत्र में प्रेरणा फैला रही है।
Updated on:
01 Apr 2026 04:42 pm
Published on:
30 Mar 2026 11:07 am
