
शेर की तरह दुर्लभ इस जीव के 350 से ज्यादा गुप्तांग हुए बरामद, दिल्ली और कई बड़े मंत्रियों से जुड़े है तार
रायपुर. छत्तीसगढ़ में एक जड़ी-बूटी की दुकान से बरामद वन्यजीवों के अंगों के बारे में चौंकाने वाला सच उजागर हुआ है। गुप्ता की दुकान से जिस दुर्लभ बंगाल मॉनिटर लिजार्ट के भारी मात्रा में गुप्तांग बरामद हुए हैं, वह शेर की तरह वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट-1972 के शेड्यूल-1 में संरक्षित है। मतलब यह जीव भी शेर की तरह ही दुर्लभ है।
दुकान से लार्ज बंगाल मॉनिटर लिजार्ट के 350 गुप्तांग बरामद हुए थे। इसका उपयोग ज्यादातर शक्तिवर्धक दवाएं बनाने में किया जाता है। दुकान के संचालक रत्नेश गुप्ता ने बयान दिया है कि वन्यप्राणियों के बरामद अंग नकली हैं। दुकानदार के इस दावे के बाद वन विभाग ने अंगों का डीएनए टेस्ट कराने का निर्णय लिया है। टेस्ट के लिए इन्हें वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के दिल्ली और हैदराबाद स्थित लैब भेजा सकता है।
अधिकारियों ने बताया कि संचालक रत्नेश गुप्ता के प्रारंभिक बयान के मुताबिक यह सामान दिल्ली से मंगाया गया है। अब दिल्ली स्थित सेंटर की पड़ताल की जा रही है। जहां से जीवों के अंगों की तस्करी की जा रही है। वन विभाग द्वारा इस मामले में टीमें गठित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। वहीं, एक टीम दिल्ली भी रवाना की जाएगी।
सूत्रों के मुताबिक राजधानी के गुप्ता दुकान में लंबे समय से जड़ी-बूटी बेचने का काम चल रहा है। वहीं, दुकान से कई आइएएस, आइपीएस सहित मंत्री, नेताओं के संपर्क है। दुकान संचालक के भाई भाजपा नेता केदारनाथ गुप्ता है, जिन्होंने एक बार फिर सभी आरोपों को निराधार बताया है।
ग्राहक बनकर आए थे एक्टिविस्ट
दिल्ली से ग्राहक बनकर आए एक्टिविस्ट दीपक कुमार ने दुर्लभ प्रजाति के जीव-जंतुओं की डिमांड की, जिसके बाद दुकान संचालक ने सामान दिखाया। जब पूरा सामना सामने रख दिया गया तो फिर पास ही छिपे हुए वन-विभाग की टीम ने फोन कर दुकान बुलाया गया।
पड़ताल में सामने आया है कि न सिर्फ रायपुर बल्कि देश के अन्य राज्यों से जीवों के इन अंगों को दिल्ली भेजा जाता है, जिसके बाद व्यापारी दिल्ली से इन सामानों की खरीदारी करते हैं। इस काम में गांव के बैगा, परंपरागत शिकार करने वाले वनवासी, वन तस्कर सहित कई लोग शामिल हैं। छत्तीसगढ़ और दिल्ली के बीच तस्करी होकर व्यापारी यह सामान दिल्ली से उठाते हैं, कई तस्कर सीधे राज्य के भीतर ही व्यापारियों को सामान बेच देते हैं।
वन विभाग डीएफओ उत्तम कुमार गुप्ता ने बताया कि जब्त अंगों के डीएनए रिपोर्ट के बाद जांच आगे बढ़ाई जाएगी। हम डीएनए टेस्ट की तैयारी कर रहे हैं। प्रारंभिक जांच के तहत बरामद जीवों के अंग नकली नहीं है।
Published on:
01 Sept 2018 11:21 am
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