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छत्तीसगढ़ BJP को बड़ा झटका, युवा मोर्चा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ने छोड़ी पार्टी, बताई ये वजह

Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ बीजेपी के सीनियर लीडर और युवा मोर्चा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रवि भगत ने बीजेपी से नाता तोड़ लिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा पत्र पार्टी के मंडल अध्यक्ष को इस्तीफा पत्र लिखकर भेजा है..
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बीजेपी युवा मोर्चा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रवि भगत का इस्तीफा

Chhattisgarh BJP News: भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रवि भगत ने पार्टी से नाता तोड़ लिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा पत्र पार्टी के मंडल अध्यक्ष रमेश होता को पत्र लिखकर अपना इस्तीफा भेजा है। इस्तीफा पत्र में रवि भगत ने निजी कारणों का हवाला देकर बीजेपी छोड़ने की वजह बताई है। इधर इस्तीफा पत्र के वायरल होते ही खलबली मच गई।

Chhattisgarh News: पत्र में कही ये बात

जानकारी के मुताबिक, रायगढ़ के लैलूंगा क्षेत्र से जुड़े भाजपा नेता रवि भगत ने पार्टी के इस्तीफा पत्र को लेकर प्रदेश की राजनीति में इसे लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। उन्होंने लिखा है कि एक छोटे से गांव के कार्यकर्ता होने के बावजूद भाजपा ने उन्हें पहचान और सम्मान दिया। जिसके लिए वे पार्टी के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। हालांकि, उन्होंने इस्तीफे में सिर्फ 'निजी कारणों' का जिक्र करते हुए भाजपा की प्राथमिक सदस्यता छोड़ने का फैसला लिया है।

सोशल मीडिया के ​जरिए दी जानकारी

बता दें कि युवा मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी से हटने के बाद रायगढ़ के लैलूंगा क्षेत्र में सक्रिय थे। इस दौरान उनके साथ क्या कुछ हुआ अभी कुछ भी बातें स्पष्ट नहीं हो पाया है। वहीं इस्तीफा पत्र की प्रतिलिपि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष, प्रदेश अध्यक्ष और जिला अध्यक्ष को भी भेजी है। 1 जुलाई को रवि भगत ने सोशल मीडिया के ​जरिए पार्टी से इस्तीफा देने की जानकारी दी। वहीं आज यह पत्र वायरल हो रहा है। इधर इस मामले में अभी तक पार्टी के किसी भी नेता का बयान सामने नहीं आया है।

संगठन ने दिखाई थी सख्ती

यह पहला मौका नहीं है जब रवि भगत को लेकर संगठन ने सख्ती दिखाई हो। इससे पहले 26 जुलाई 2025 को भाजपा प्रदेश कार्यालय की ओर से उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। नोटिस में सोशल मीडिया पर पार्टी की रीति-नीति और संगठनात्मक अनुशासन के खिलाफ टिप्पणी करने का आरोप लगाया गया था।

प्रदेश महामंत्री और मुख्यालय प्रभारी जगदीश (रामू) रोहरा ने उनसे तीन दिन के भीतर जवाब मांगा था और स्पष्ट किया था कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासन की कार्रवाई की जा सकती है। ऐसे में उनके इस्तीफे को इसी घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है।