
पं. माधवराव सप्रे जयंती मनाई
Chhattisgarh News: रायपुर। गुरुकुल गर्ल्स कॉलेज में पं. माधवराव सप्रे जयंती मनाई गई। मुख्य वक्ता लखनऊ विवि के प्राध्यापक और आलोचक सूरज बहादुर थापा ने कहा कि जीवन की मर्यादाओं को तार-तार करके कोई विमर्श अथवा अस्मिता का जागरण नहीं किया जा सकता है।
क्रांति जमीनी स्तर पर बदलाव के बाद आती है। स्त्री विमर्श कोई फैशन नहीं। छत्तीसगढ़ साहित्य एवं संस्कृति संस्थान के महासचिव सुधीर शर्मा ने पं सप्रे जयंती की पृष्ठभूमि और छत्तीसगढ़ मित्र के प्रकाशन (cg news) की महत्ता का जिक्र किया। थापा ने कहा कि समकाल की एक निश्चित सीमा होती है। समकालीन कहानी में दलित, स्त्री और विविध विमर्श नये संदर्भों के साथ प्रस्तुत हुए हैं। कथा साहित्य ने अधिकारों की लड़ाई के लिए हिंसा के बजाय गांधीवादी संघर्ष को चुना है।
व्यंग्यकार गिरीश पंकज ने कहा कि आज की कहानियां विवाद को ध्यान में रखकर लिखी जा रही हैं। भाषा के स्तर पर पतन हो रहा है। ओल्ड के बजाय बोल्ड का सहारा लिया जा रहा है। भाषाविद चित्तरंजन कर ने कहा कि आज का समय चुनौतीपूर्ण है। विमर्श अच्छे उद्देश्य के लिए प्रारंभ हुआ था, पर यह अतिवाद का शिकार हो रहा है। कथाकार परदेशी राम वर्मा ने कहा कि हिंदी की कहानी ने लौ को जीवित रखा है। पर आज प्रेमचंद की कहानियों का विस्तार नहीं हो पा रहा है।
Published on:
20 Jun 2023 11:09 am
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