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बारिश में बढ़ीं शिकायतें : लीकेज से नलों में मटमैला पानी, बीमारी का खतरा….200 से 250 सैम्पल रोज ले रहा निगम

Raipur News: शहर की 15 लाख आबादी के लिए 43 टंकियों से जलापूर्ति की जा रही है। परंतु बरसात होने के साथ ही नलों में मटमैला और गंदा पानी आने की शिकायतें भी तेजी से बढ़ रही हैं।

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Risk of disease increasing due to dirty water in rain

बारिश में बढ़ीं शिकायतें

Chhattisgarh News: रायपुर। शहर की 15 लाख आबादी के लिए 43 टंकियों से जलापूर्ति की जा रही है। परंतु बरसात होने के साथ ही नलों में मटमैला और गंदा पानी आने की शिकायतें भी तेजी से बढ़ रही हैं। सबसे बड़ी वजह पाइपलाइनों में लीकेज है। जिन जगहों पर पाइप लीकेज हो जाता है, वहां से गंदगी भी पानी में मिल जाती है। इससे डायरिया और पीलिया जैसी रोग जनित बीमारी के खतरे से इनकार नहीं किया जा सकता है।

शहर में रोज कहीं न कहीं लीकेज सुधारने के लिए (Raipur news) खोदाई की जा रही है। वहीं निगम का जल विभाग रोज 200 से 250 जगहों से पानी का सैम्पल लेना शुरू किया है।

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सवाल उठ रहा है कि करोड़ों रुपए की अमृत मिशन योजना से नई पाइप लाइनें बिछने के बाद भी लोगों को शुद्ध पेयजल आपूर्ति नहीं हो पा रही है। क्योंकि इस योजना की पाइपलाइन में लीकेज की सबसे अधिक समस्या है। पंडित सुंदरलाल शर्मा वार्ड के कई जगहों में लीकेज को ठीक कराने में कई दिन लग गए। दो-तीन दिनों से सदरबाजार जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्र में पाइपलाइन के लीकेज को सुधारने के लिए सत्तीबाजार चौक में दो जगह गड्ढे खोदे जा रहे हैं। यहां लीकेज ठीक करने के लिए अमला जुटा नजर आया। ऐसा ही हाल पुरानी पाइप लाइनों का है। क्योंकि अभी इंटर कनेक्शन हर घर में नई पाइपलाइन से नहीं हो पाया है।

फिल्टर प्लांट में फिटकरी का उपयोग 4 गुना बढ़ा

खारुन नदी से गंदा और मटमैला पानी फिल्टर प्लांट में शुद्ध किया जा रहा है। बारिश होने के बाद से प्लांट में फिटकरी का उपयोग 4 गुना बढ़ा गया है। अधिकारियों के अनुसार सामान्य दिनों में जहां हर दिन 5 से 6 टन फिटकरी जलशुद्धिकरण के लिए लगती थी तो आज इसकी मात्रा 20 टन तक पहुंच गई है। इसलिए फिल्टर प्लांट से शुद्ध पानी टंकियों में भेजा जा रहा है।

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जिम्मेदार बोले-मटमैला पानी आना आम बात

निगम के जिम्मेदार नलों में मटमैला और गंदा पानी आने की समस्या को खतरनाक नहीं मानते, जिसकी वजह से डायरिया और पीलिया जैसी बीमारी हो (CG Hindi News) जाती है। तर्क दिया जा रहा है कि बरसात में मटमैला पानी आम बात है। इसकी जानकारी होने पर तुरंत ठीक कराया जाता है।

बरसात में मटमैला पानी नलों में आने की शिकायतें ज्यादा होती हैं, इसका मतलब ये नहीं कि पानी प्रदूषित है। फिल्टर प्लांट में 20 टन फिटकरी से शुद्धिकरण किया जा रहा है। पाइपलाइन लीकेज से जरूरत ऐसी स्थिति बनती है। इसे देखते हुए शहर के 200 से 250 जगहों से हर दिन पानी का सैम्पल लिया जा रहा है, लेकिन रिपोर्ट ठीक आ रही है।

नरसिंह फरेंद्र, कार्यपालन अभियंता जल विभाग निगम

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