
विनोद कुमार शुक्ल को साहित्य अकादमी की प्रतिष्ठित महत्तर सदस्यता
रायपुर. हिंदी के प्रख्यात कवि व गद्यकार विनोद कुमार शुक्ल को साहित्य अकादमी की प्रतिष्ठित महत्तर सदस्यता (फैलोशिप) प्रदान की गई है। यह फैलोशिप साहित्य अकादमी द्वारा दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान है। अंग्रेजी के प्रसिद्ध लेखक रस्किन बांड को भी महत्तर सदस्य घोषित किया गया है। बता दें कि साहित्य अकादमी के महत्तर सदस्य के रूप में एक समय में 24 भारतीय भाषाओं के कुल 21 सदस्य ही हो सकते हैं।
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छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के रहने वाले साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल का पहला कविता संग्रह 1971 में 'लगभग जय हिन्द' नाम से प्रकाशित हुआ था। 1979 में नौकर की कमीज नाम से उनका उपन्यास आया। कई सम्मानों से नवाजे जा चुके विनोद कुमार शुक्ल को उपन्यास 'दीवार में एक खिड़की रहती थी' के लिए वर्ष 1999 का 'साहित्य अकादमी' पुरस्कार प्राप्त हो चुका है।
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छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बधाई देते हुए ट्वीट किया- 'विनोद कुमार शुक्ल जी को बहुत बहुत बधाई। बधाई पूरे छत्तीसगढ़ को। हमें उन पर गर्व है।' बता दें कि साहित्य अकादमी की फैलोशिप पाने वाले अन्य लेखकों में सिरशेंदु मुखोपाध्याय (बांग्ला), एम. लीलावती (मलयालम), डॉ. भालचंद्र नेमाडे (मराठी), डॉ. तेजवंत सिंह गिल (पंजाबी), स्वामी रामभद्राचार्य (संस्कृत) और इंदिरा पार्थसारथी (तमिल) शामिल हैं।
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Published on:
20 Sept 2021 02:28 am
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