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मानव विकास के प्रकाश स्तंभ हैं संत कबीर : पवन साहेब

श्रीकबीर संस्थान नवापारा राजिम में सदगुरु कबीर की 623वीं जयंती मनाई गई। सदगुरु कबीर के बारे में पवन साहेब के द्वारा कबीर भजन प्रस्तुत किया गया।

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मानव विकास के प्रकाश स्तंभ हैं संत कबीर : पवन साहेब

मानव विकास के प्रकाश स्तंभ हैं संत कबीर : पवन साहेब

नवापारा-राजिम. श्रीकबीर संस्थान नवापारा राजिम में सदगुरु कबीर की 623वीं जयंती मनाई गई। सदगुरु कबीर के बारे में पवन साहेब के द्वारा कबीर भजन प्रस्तुत किया गया। उन्होंने सदगुरु कबीर के बारे में कहा कि कबीर मानव विकास के प्रकाश स्तंभ हैं। साथ ही मानव एकता का अनूठा संगम भी उनके जीवन का हर पार्षद अपने में संपूर्ण और ज्योतिर्मय हैं। उनकी दृष्टि में पवित्र भावना से किया गया। हर कर्म पूजा है।
संत सुरेंद्र साहेब ने कबीर साहेब के बारे में विचार व्यक्त किए उसने कहा कि कबीर का संदेश है तन से कर्म परायण होना किंतु मन से आत्मपरायण होना उनकी वाणीयां मानव मात्र को निष्पक्षता पूर्वक सत्य को समझने एवं आचरण करने को प्रेरित करती हैं कबीर की वाणी आने वाले हिंदुस्तान का सपना है, जिसमें दुनियादारी और दुनिया का त्याग आध्यात्मिक और आत्मिक जीवन का खूबसूरत संगम बनने वाला है। संत हरेंद्र साहेब ने कहा कि कबीर संत कवि ही नहीं, अपितु, संपूर्ण हिंदी साहित्य तथा भारतीय संत कवियों में कबीर का अन्यतम स्थान तो है ही पूरे विश्व की संत परंपरा में भी वे शीर्ष स्थान पर हैं। उनका अवतरण मध्य काल में हुआ था यह वह काल था जब धार्मिक संकीर्णता, जातीय संघर्ष, सांप्रदायिक उन्माद व सामाजिक भेदभाव चरम सीमा पर थे। मध्य युग के उस संक्रमणकाल में अद्भुत प्रतिभा साहस व व्यक्तित्व लेकर कबीर का अवतरण हुआ, उनकी मर्म बेदी दृष्टि धार्मिक पाखंड एवं अंधविश्वासों के कुहासे को चीर कर शाश्वत सत्य व मानवता को देख लेने में पूर्ण रूप से सक्षम थी। धार्मिक जड़ता जाति व्यवस्था एवं वर्ण अभिमान के समर्थकों को उन्होंने खुली चुनौती दी और धार्मिक स्वतंत्रता तथा मानव समानता पर आधारित समाज संरचना पर बल दिया। उनकी दृष्टि में सत्य सर्वोपरि था सत्य उनका साघ्य था और साधन भी।
श्रीकबीर संस्थान के अध्यक्ष विचार साहेब ने सतगुरु कबीर के बारे में विचार रखा कि सदगुरु कबीर ने अपना कोई जीवन वृत्त नहीं लिखा है। विभिन्न साक्ष्यों के आधार पर या निर्धारित हुआ है कि उनका जन्म विक्रम संवत 1455 में हुआ था और मृत्यु विक्रम संवाद 1575 मे उसने कहा कि कबीर मानव एकता के उद्घोषक स्वतंत्र प्रिय संत शिरोमणि कबीर साहेब की वाणी से प्रेरणा प्राप्त कर मानव जीवन को सम उज्जवल बनाने तथा सुंदर समाज संरचना के उद्देश्य से यह कार्यकर्म होता है। यशवंत साहू ने अपने विचार व्यक्त किए उन्होंने कहा कि यहां पर रहने वाले सभी संत वैराग्यवान है व कबीर के प्रतिनिधि के रूप में धर्म का प्रचार और प्रसार कर रहे हैं। हम सभी को उनके साथ बैठ कर के मानव जीवन के उद्देश्य को समझना चाहिए और रहनी के अनुसार अपने आप को ढालने का प्रयास करना चाहिए ।