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सब होही राख, तेकरे सेती भगवान संकर हा चुपर ले हे राख

संत पवन दीवान ह 2016 म 2 मार्च के छत्तीसगढ़ अउ देस ल सुन्ना करके अपन लोक म चल दिस। छत्तीसगढ़ के जौन कविमन ल देस म पहचान मिलिस वोमा संत पवन दीवान के बहुत बड़े स्थान हे।

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सब होही राख, तेकरे सेती भगवान संकर हा चुपर ले हे राख

सब होही राख, तेकरे सेती भगवान संकर हा चुपर ले हे राख

संत पवन दीवान ह 2016 म 2 मार्च के छत्तीसगढ़ अउ देस ल सुन्ना करके अपन लोक म चल दिस। छत्तीसगढ़ के जौन कविमन ल देस म पहचान मिलिस वोमा संत पवन दीवान के बहुत बड़े स्थान हे। राजिम तीर के गांव किरवई म 1 जनवरी 1946 के दीवानजी के जनम होइस। पिताजी सुखराम धर दीवान गुरुजी रिहिस। महतारी कीरति दीवान किरवई तीर के गांव छटेरा ले आय रिहिस। धरम साहित्य अउ सेवा के संस्कार महतार- बाप से मिलिस। डॉ. खूबचंद बघेल के गांव पथरी म माता कीरति के ममागांव रिहिस। दीवानजी के ममादाई के नाम कौसल्या रिहिस।
डॉ. खूबचंद बघेल के भातरी संघ के अव्वल कवि पवन दीवान ह छत्तीसगढ़ के भाव अउ परभाव ल लेके बड़े से बड़े मैदान म ललकारिस अउ जीतिस। स्यामाचरन बघेल के नेतृत्व म मनवा कुरमी समाज के महाअधिवेसन म गोढ़ी गांव म एक परस्ताव पास होय रहिस। ये पहिला परस्ताव रहिस जेमा माता कौसिल्या बर पूरा समाज ह एकजुट होके मंदिर के परस्ताव पास करिस। सरकार ह माता कौसिल्या सोध पीठ बनइस। दीवानजी ह ये सब घटना अउ परस्ताव ल जानके गद्गद् हो गे रहिस। परवचन, सामाजिक बइठ सबे मौका म दीवानजी ह माता कौसिल्या अउ छत्तीसगढ़ के भांचा रामजी के कथा बताय म गमन हो जाय।
वोकर ये बात ह सबला बहुत सुहावय के भारत देस ल भारत माता कहे जाथे, वोकर संग छत्तीसगढ़ ह महतारी कहाथे। ‘जय-जय छत्तीसगढ़ महतारी’ उंकर बहुत परसिद्ध कविता हे। समता अउ एकता के धरती छत्तीसगढ़ बर उंकर कविता हे।
तोर धरती, तोर माटी रे भइया, तोर धरती, तोर माटी। धरती बर तो सबो बरोबर, का हाथी, का चांटी रे भइया,
तोर धरती, तोर माटी।
दीवानजी साहित्यकारमन के संगी रहिस। जीवनभर छत्तीसगढ़ के जस गाए के उदिम करिन। धरम, परवचन, राजनीति, कविता चारोंमुड़ा भन्नाटी ***** विचार के चरखी चलइस।
पवन दीवान ह माता बर लिखे हे-
तेंहा सब ला सब दे हस।
हम मन ला बटोरे हन।
तोला हम कुछू नइ लहुटा पायेन।
तोर मन ला घेर-बेर टोरे हन।
पवन दीवान ह अपन कविता राख म राख महिमा बतावय। ये कविता ह सबले जादा सुने गिस।
‘राखबे त राख,
नइ राखस ते झन राख,
कतको राखे के कोसिस करिन,
नइ राखे सकिन।
मैं बतावत हंव तेन बात ल,
धियान म राख।, तहूं होबे राख।
महूं होहूं राख, सब होही राख।
तेकरे सेती भगवान संकर हा,
चुपर लेहे राख।’