
ध्यान रहे गलती से भी तुलसी में न जाए शिवलिंग पर चढ़ा हुआ पानी वरना कई सावन निकल जाएंगे भोलेनाथ को मानाने में
शिवलिंग पर न ही तुलसी और तुलसी पर शिवलिंग की कोई चीज चढ़ाई जाती है। ऐसा करने से आपके काम बनने के बजाए बिगड़ने लगेंगे। क्योकि मानयताओं और शास्त्रों के अनुसार अगर आप ऐसा करते हैं तो इस दोनों को क्रोधित कर रहे हैं। और आपको लम्बा वक़्त लग सकता है पूजा अर्चना कर इनको मानाने में। तो आइये जानते है इसके पीछे की पूरी कहानी।
शास्त्रों के अनुसार शिवलिंग पर तुलसी के पत्ते और न ही शिवलिंग पर चढ़ा पानी तुलसी में नहीं चढ़ाए जाते। इसके पीछे की कहानी यह है कि पौराणिक मान्यता के अनुसार जालंधर नाम का असुर जिसे अपनी पत्नी की पवित्रता और विष्णु जी के कवच की वजह से अमर होने का वरदान प्राप्त था।
इसका फायदा उठाकर वह सभी जगह अपना आतंक फैला रहा था। इसके आतंक से परेशान होकर भगवान विष्णु और भगवान शिव ने उसे मारने की योजना बनाई। पहले भगवान विष्णु ने जालंधर से अपना कवच मांगा फिर उसकी पत्नी की पवित्रता भंग
की जिससे भगवान शिव को जालंधर को मारने का मौका मिल गया। जब पत्नी वृंदा को अपने पति जालंधर की मौत की सूचना मिली तो उसे बहुत दुख हुआ और गुस्से में उसने भगवान शिव को श्राप दिया कि उन पर तुलसी की पत्ती कभी नहीं चढ़ाई जाएगी और जो ऐसा करेगा वह कभी सुखी नहीं रहेगा। इसी वजह से शिवजी की किसी भी पूजा में तुलसी के पत्ते नहीं चढ़ाते। और शिव पर चढ़ी कोई चीज तुसी पर नहीं चढ़ाई जाती यह बहुत ही नकारात्मक और हानिकारक परिणाम देता है।
तुसली के अलावा ये चीजें भी नहीं चढ़ाई जाती शिवलिंग पर -
शंख
भगवान के पूजन कार्य में शंख का उपयोग महत्वपूर्ण होता है। लगभग सभी देवी-देवताओं को शंख से जल चढ़ाया जाता है लेकिन शिवलिंग पर शंख से जल चढ़ाना वर्जित माना गया है। आखिर क्यों शिवजी को शंख से जल अर्पित नहीं करते है। इस संबंध में शिवपुराण में वर्णन मिलता है। भगवान शिव की पूजा कभी शंख से नहीं करनी चाहिए। माना जाता है कि भगवान शिव ने शंखचूर्ण नाम के एक राक्षस का वध किया था और शंख उसी असुर का प्रतीक है। इसलिए कभी भी शंख से भगवान शिव की पूजा न करें।
हल्दी
भगवान की पूजा करते समय हल्दी की इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन भगवान शिव की पूजा में हल्दी का प्रयोग नहीं करना चाहिए। दरअसल, हल्दी का संबंध भगवान विष्णु और सौभाग्य से है। इसलिए यह भगवान शिव को नहीं चढ़ती है। अगर आप ऐसा करते है तो इससे आपका चंद्रमा कमजोर होने लगेगा और आपका ध्यान भटकने लगेगा।
केतकी का फूल
केतकी का फूल भी भगवान शिव पर अर्पण नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही उन पर साबुत चावल ही अर्पण करें न कि टूटा हुआ चावल। टूटा हुआ चावल अशुद्ध माना जाता है, इसलिए ये उन पर नहीं चढ़ाना चाहिए।
Published on:
31 Jul 2018 07:08 pm
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