
छत्तीसगढ़ संवाद का कारनामा, पांच साल में गैरजरूरी कामों पर खर्चे 500 करोड़ रुपए
रायपुर. छत्तीसगढ़ संवाद ने अपने गठन के उद्देश्यों को दरकिनार करके करोड़ों का भुगतान चुनिंदा फर्मों को किया। संवाद का गठन एक संस्था के रूप में शासन की योजनाओं के पत्र-पत्रिकाओं का प्रकाशन, शासन सभी विभागों, मंडलों व शासकीय/अर्धशासकीय संस्थाओं के विज्ञापन को डिजाइन करके पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित करना है। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में प्रसारित करना है।
इन सभी उद्देश्यों के विपरीत संवाद ने बीते 5 वर्षों 500 करोड़ का नियम विरुद्ध काम किया है। संवाद ने इवेंट मेनेजमेंट, किताब, कापियों की छपाई व लाभार्थी कार्ड की छपाई करवा कर चहेती फर्मों को करोड़ों का लाभ पहुंचाया है। पत्रिका को मिले दस्तावेज बताते हैं कि संवाद में बायलॉज के विपरीत जाकर काम कराकर करोड़ों का भुगतान किया गया।
व्यापक इंटरप्राइजेस को इवेंट मैनेजमेंट के लिए 49 करोड़ 59 लाख 96 हजार रुपए का भुगतान किया गया। इसके अलावा रायपुर की कयूमी प्रिंटर्स से ओपन स्कूल की पुस्तकों की छपाई भी 40 फीसदी अधिक दर पर कराई गई थी। इसी प्रिंटर्स से प्रधानमंत्री की आयुष्मान भारत योजना के कार्ड की भी छपाई बिना शासन के आदेश के 22 फीसदी अधिक दर पर कराई गई।
रविवि की कॉपियों की भी प्रिंटिंग
संवाद के द्वारा बिना शासन के आदेश के 2018 में चोरी-छुपे पं. रविशंकर विश्वविद्यालय रायपुर के लिए 19 लाख उत्तर पुतिकाओं की छपाई कराई गई थी। अहम बात यह है कि प्रिटिंग होने के बाद वर्कआर्डर जारी किया गया। मामले की जांच अब भी लंबित है।
महालेखाकार की आडिट से भी बाहर
संवाद को फर्म एंड सोसायटी अधिनियम के तहत रजिस्टर्ड होने का बहाना बताकर इसे महालेखाकार के आडिट से भी दूर रखा गया है। जिसका पूरा फायादा यहां जमे हुए अधिकारियों ने उठाया।
विकास यात्रा पर 19 करोड़ का भुगतान
रमन सरकार ने विकास यात्रा और अटल विकास यात्रा के नाम पर 19 करोड़ से ज्यादा का गोलमाल किया गया। जनसंपर्क के अधिकारियों ने कम दर भरने वाली फर्म को हटा दिया। कम दर भरने वाली फर्म को बाहर करके 250 फीसदी अधिक में रायपुर की व्यापक इंटरप्राइजेस को कार्यादेश दे दिया गया था। संवाद के उद्घाटन में इवेंट मैनेजमेंट कंपनी को 69 लाख का भुगतान किया गया।
किताबों की छपाई में गोलमाल
संवाद के माध्यम से साल 2016-17 में छत्तीसगढ़ में राज्य ओपन स्कूल की किताबों की छपाई 8 करोड़ 64 लाख 17 हजार 883 रुपए का लगभग 43 लाख 20 हजार 894 रुपए की चपत लगाई थी। गुणवत्ता के विपरीत प्रिंटिंग की गई थी। किताबों की छपाई सीटफेड आफसेट मशीन में प्रिटिंग में करना था। लेकिन वेब प्रिटिंग मशीन में छपाकर चपत लगाई गई। इसके अलावा पुस्तकों की छपाई ए-4 साइज में करना था, लेकिन प्रिंटरों ने मनमानी करते हुए साइज में 12.25 प्रतिशत की कटौती कर करोड़ों रुपए की चपत लागई।
आयुष्मान भारत- प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना
मोदी की आयुष्मान योजना में भी कमीशनखोरी, आदेश के 10 पहले ही जारी कर दिया। संवाद के माध्यम से आयुष्मान भारत- प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के कार्ड प्रिटिंग कराया गया। जिसे विभाग ने एल-1 निर्धारित किया था। एल-2 स्वास्तिक प्रिंटर्स ने 4.50 और एल-3 मेसर्स कयूमी प्रिंटर्स ने 5.75 रुपए दर रखी थी। सबसे ज्यादा दर भरने वाले मेसर्स कयूमी प्रिंटर्स ने 5.75 रुपए 25 लाख कार्ड छापने का जिम्मा दिया गया।
जनसंपर्क विभाग के आयुक्त तारण प्रकाश सिन्हा ने बताया कि संवाद में हुए कार्यों की जांच ईओडब्ल्यू और हमारी खुद की जांच दल द्वारा कराई जा रही है। इससे जुड़े दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
Published on:
25 Mar 2019 11:06 am
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