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Scissors on public’s pocket: पैकेज कम होने का हवाला देकर मरीजों से अतिरिक्त पैसे ले रहे अस्पताल

राजधानी रायपुर (the capital Raipur) समेत प्रदेश के कुछ निजी अस्पताल (some private hospitals) आयुष्मान भारत योजना (Ayushman Bharat scheme) में बीमारियों का पैकेज कम होने का हवाला देकर मरीजों से अतिरिक्त पैसे ले रहे हैं। वहीं, कुछ निजी अस्पताल लंबे समय से भुगतान नहीं होने की बात कहकर मरीजों का फ्री इलाज करने से मना कर रहे हैं।

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Scissors on public's pocket: पैकेज कम होने का हवाला देकर मरीजों से अतिरिक्त पैसे ले रहे अस्पताल

Scissors on public's pocket: पैकेज कम होने का हवाला देकर मरीजों से अतिरिक्त पैसे ले रहे अस्पताल

खर्च चलाने में आ रही परेशानी का हवाला

इस बीच आईएमए ने योजना के तहत इलाज बंद करने का कोई आदेश अस्पतालों को जारी नहीं किया है, लेकिन वे अस्पताल का खर्च चलाने में आ रही परेशानी का हवाला दे रहे हैं। परेशानी मरीजों की बढ़ी है। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग भुगतान को लेकर गंभीर नहीं है। प्रदेश के 1026 सरकारी व 553 निजी अस्पतालों में आयुष्मान योजना के तहत बीपीएल परिवार का सालाना 5 लाख व एपीएल परिवार का 50 हजार रुपए तक सालाना इलाज हो रहा है। पत्रिका की पड़ताल में पता चला है कि निजी अस्पताल स्थापना खर्च व इंप्लांट महंगा होने का हवाला देकर मरीजों से अतिरिक्त शुल्क ले रहे हैं। मरीज भी नानुकूर के पैसे देने के लिए तैयार हो जाता है। उनकी ये सोच होती है कि चलो इलाज के लिए काफी पैसे उन्हें नहीं देने पड़ रहे हैं।

कभी-कभार ऐसे अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई

योजना का संचालन करने वाली स्टेट नोडल एजेंसी (एसएनए) कभी-कभार ऐसे अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई करती है। बेहतर मॉनीटरिंग नहीं होने के कारण मरीज एक तरह से शोषित हो रहे हैं। जानकारों का कहना है कि एक-दो नहीं, बल्कि ज्यादातर निजी अस्पताल किसी न किसी बहाने से मरीजों से अतिरिक्त राशि ले रहे हैं। मरीज या उनके परिजन टोल फ्री नंबर 104 पर ऐसी शिकायतें रोज करते हैं, लेकिन एसएनए के अधिकारियों व कुछ अस्पतालों की मिलीभगत से कोई कार्रवाई नहीं होती। उल्टा अस्पताल व शिकायतकर्ता के बीच सुलह का रास्ता निकाला जाता है। ताकि मामले में किसी कार्रवाई से बचा जा सके।

अतिरिक्त राशि नहीं लेने पर अटेंडेंट से महंगी दवाइयां खरीदवा रहे

कुछ निजी अस्पताल पैकेज में मरीजों का इलाज कर रहे हैं, लेकिन वे कुछ जरूरी इंजेक्शन व दवाइयां अटेंडेंट से बाहर से मंगा रहे हैं। जब परिजन कहते हैं कि उनके पास तो आयुष्मान कार्ड है तो स्टाफ का कहना होता है कि पैकेज में ये महंगे इंजेक्शन व दवाइयां शामिल नहीं हैं। ऐसे में मरीज के स्वास्थ्य की बेहतरी के लिए परिजन महंगी दवाइयां खरीदने के लिए मजबूर हैं। कुछ अस्पताल परिसर स्थित मेडिकल स्टोर से दवा खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं, जहां दवाइयां काफी महंगी होती है। एमआरपी पर एक रुपए की छूट नहीं दी जाती। हाल में सीएमएचओ कार्यालय ने सभी अस्पताल संचालकों व आईएमए को पत्र लिखकर दवाओं में छूट देने व बाहर से दवा खरीदने की अनुमति देने को कहा था। हालांकि इसका कोई असर नहीं पड़ा है। सीएमएचओ कार्यालय भी पत्र लखिकर भूल गया है।

आंबेडकर अस्पताल में 70 व डीकेएस 50 करोड़ बकाया, बड़े अस्पतालों को भी परेशानी

नियमित भुगतान नहीं होने से न केवल छोटे, बल्कि बड़े अस्पतालों को भी परेशानी हो रही है। स्टाफ को वेतन से लेकर वेंडर्स के भुगतान में दिक्कत हो रही है। अस्पतालों का कहना है कि फ्री इलाज नहीं करने की उनकी मजबूरी है। नियमित पेमेंट हो तो अस्पताल चलाने में आसानी होगी। आंबेडकर अस्पताल का 60 से 70 करोड़ व डीकेएस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का 50 करोड़ रुपए से ज्यादा बकाया है। वहीं कई बड़े निजी अस्पतालों का 17 से 20 करोड़ रुपए बकाया है। अस्पतालों का कहना है कि नई सरकार में पेमेंट धीमा हो गया है। बैकलॉग पेमेंट भी नहीं हो रहा है।

दवाओं में छूट देने को कहा

आईएमए, निजी अस्पतालों, नर्सिंग होम, मेटरनिटी होम व क्लीनिक को पत्र लिखकर दवाओं में छूट देने को कहा गया है। यही नहीं, खुद के मेडिकल स्टोर से दवा खरीदने के लिए दबाव नहीं डालने को कहा गया है। किसी अस्पताल से योजना के तहत इलाज बंद करने की सूचना नहीं दी है।

  • डॉ. मिथेलश चौधरी, सीएमएचओ रायपुर जिला