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सीनियर्स विरोध से हटे, हड़ताल पर डटे रहे जूनियर डॉक्टर, मरीज हुए परेशान

डॉक्टरों से मारपीट के मामले में आंबेडकर अस्पताल के जूनियर डॉक्टर दो गुटों में बंट गए हैं।
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रायपुर

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Deepak Sahu

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Updated: 28 Sep 2018, 11:50 AM IST

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सीनियर्स विरोध से हटे, हड़ताल पर डटे रहे जूनियर डॉक्टर, मरीज हुए परेशान

रायपुर. डॉक्टरों से मारपीट के मामले में आंबेडकर अस्पताल के जूनियर डॉक्टर दो गुटों में बंट गए हैं। बुधवार को देर शाम तक मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के साथ बैठकों के बाद जूडॉ एसोसिएशन पदाधिकारियों के साथ सीनियर छात्रों ने हड़ताल स्थगित कर दी, वहीं फस्र्ट इयर के छात्रों ने गुरुवार सुबह अनिश्चितकालीन हड़ताल के साथ सामूहिक इस्तीफा देने का एेलान कर दिया है। साथ ही अस्पताल परिसर में तंबू गाडक़र विरोध शुरू कर दिया है।

जूडॉ का कहना है कि आए दिन डॉक्टरों से मारपीट की घटनाएं सामने आ रही हैं। वहीं, प्रबंधन सिर्फ आश्वासन दे रहा है, मौदहापारा थाने के मुताबिक अबतक इस घटना की एफआइआर तक दर्ज नहीं कराई गई है, जबकि प्रबंधन ने बुधवार को रिपोर्ट दर्ज कराने की बात कही थी। एेसे में डॉक्टरों पर हमला करने वाले आरोपी खुले आम घूम रहे हैं। इस बीच जूडॉ के भरोसे चलने वाले अस्पताल में इलाज के लिए दिनभर मरीज भटकते रहे।

हड़ताल पर बैठे लगभग 100 -150 डॉक्टरों की वजह से आपात सेवाओं सहित ओपीडी और आइपीडी की सेवाएं भी प्रभावित रहीं। पत्रिका ने सुबह 11 :30 बजे अस्पताल के ट्रामा सेंटर का जायजा लिया, जहां आइसीयू सहित ट्रामा सेंटर में सिर्फ एक डॉक्टर की मौजूदगी देखने को मिली। इनकी गैर-मौजूदगी में नर्सें कार्य संपादित करती दिखीं। ओपीडी में सीनियर डॉक्टरों को मोर्चा संभालना पड़ा।

फस्र्ट इयर के छात्र डॉ. राहुल शुक्ला ने बताया कि हमसे लगातार 60 घंटे की ड्यूटी कराई जा रही है, जो कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का खुला उल्लंघन है। वहीं, अस्पताल परिसर में उपकरणों के अभाव के भी आरोप डॉक्टरों ने लगाए।

पत्रिका टीम सर्जरी वार्ड नंबर 18 पहुंची जहां हालात काफी बदतर नजर आए। एक महिला की छाती से दिनभर रक्त स्राव होता रहा पर कोई भी जिम्मेदार डॉक्टर उसके इलाज के लिए मौजूद नहीं रहे। सर्जरी के बाद दवाओं सहित ड्रेसिंग के लिए घंटों तक इंतजार करते रहे।

मानदेय में भी वृद्धि की जाए

जूडॉ अध्यक्ष डॉ. प्रभात जायसवाल ने पत्रिका को बताया, कि बुधवार को प्रबंधन की ओर से मांगों पर सकारात्मक आश्वासन दिया है, जिसमें एफआइआर सहित सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करने की मांग भी शामिल है। वहीं, मौदहापारा थाने के मुताबिक अस्पताल अधीक्षक की तरफ से सिर्फ एक शिकायत मात्र की गई है, जिसमें पीडि़त डॉक्टर सहित आरोपी परिजनों की कोई जानकारी नहीं है।