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गोवर्धनमठ पुरी के शंकराचार्य ने कहा- भारत ही नहीं पूरा एशिया महाद्वीप भी होगा हिन्दूराष्ट्र

इस दौरान गोवर्धनमठ पुरी पीठाधीश निश्चलानंद सरस्वती से 184 लोगों ने दीक्षा लेकर गुरु मंत्र लिया। दीक्षा में, जो भी व्यक्ति जिस भी ईष्ट का मानता है, उस देवी-देवता का मंत्र लिया। गृहस्थों के लिए नाम मंत्र, ताकि गृहस्थ जीवन का पालन कर सकें। गुरुदेव मंत्र को उपदेश किया, इस मंत्र को निरंतर जप करने से जप का अधिकारी बन जाएंगे।

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जगदलपुर. गोयल धर्मशाला में निवास के दौरान गोवर्धनमठ पुरी पीठाधीश निश्चलानंद सरस्वती ने धर्म संगोष्ठी में लोगों के सवालों का एक-एक कर जवाब दिया। इस दौरान उन्होने कहा कि भारत ही नहीं पूरे एशिया महाद्वीप को सनातनी सभ्यता का वाहक बनाना है, इस अभियान को लेकर विगत 17 माह से देश और एशिया के अन्य देशों में सनातनियों के बीच पहुंच रहा हूॅं। उन्होंने कहा कि मेरे लिए कुछ असंभव नहीं है। जब मैं दिल्ली में स्कूल में पढ़ाई कर रहा था। तब किसी सज्जन ने मुझे भगवान श्री शंकराचार्य जी का चित्र दिया था। उस समय मेरे मन में शंकराचार्य बनने का विचार आया और मै बन गया। सनातन संस्कृति को स्थापित करने का संकल्प मैने लिया है।

शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने धर्मांतरण को लेकर एक सवाल पर कहा कि, मैं ईसाइयों से कहता हूं आप ईसा मसीह को मानते हैं तो उनके बारे में कितना जानते हैं? उन्होंने कहा कि, रोम में ईसा मसीह की प्रतिमा वैष्णव तिलक में है। वह वैष्णव हो गए। जो लोग ईसा मसीह के नाम पर ईसाई बन रहे हैं उन्हें उनका इतिहास नहीं मालूम। ईसा मसीह कई सालों तक कहां रहे यह किसी को नहीं पता। भारत में ईसा मसीह 3 साल तक थे। रोम में ईसा मसीह की प्रतिमा को ढक दिया गया है। जिसे अब तक खोला नहीं गया है। उन्होंने कहा कि, संघ के संचालक रहे सुदर्शन मेरे पास आते थे। उन्होंने ईसा मसीह को लेकर मुझे एक इतिहास बताया था। ईसा मसीह को जब सूली पर चढ़ा दिया गया था और उन्होंने समझा अब ईसा मसीह मर जाएंगे। लेकिन ईसा मसीह जीवित निकले और पैदल घूमते-घूमते भारत के जम्मू कश्मीर में आ गए थे। आज भी जम्मू-कश्मीर में ईसा मसीह की समाधि है। इस इतिहास का क्या करेंगे?

184 लोगों ने ली गुरु दीक्षा
इस दौरान गोवर्धनमठ पुरी पीठाधीश निश्चलानंद सरस्वती से 184 लोगों ने दीक्षा लेकर गुरु मंत्र लिया। दीक्षा में, जो भी व्यक्ति जिस भी ईष्ट का मानता है, उस देवी-देवता का मंत्र लिया। गृहस्थों के लिए नाम मंत्र, ताकि गृहस्थ जीवन का पालन कर सकें। गुरुदेव मंत्र को उपदेश किया, इस मंत्र को निरंतर जप करने से जप का अधिकारी बन जाएंगे।