27 अक्टूबर 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

रायपुर में एंटी रैबीज वैक्सीन की किल्लत, मरीजों की बढ़ी परेशानी, पूरा डोज नहीं मिलने से हो रही मौतें

Rabies vaccine shortage Raipur: रायपुर में सरकारी अस्पतालों में एंटी रैबीज वैक्सीन की कमी से डॉग बाइट पीड़ितों की परेशानी बढ़ रही है। पूरा डोज नहीं मिलने पर रैबीज का खतरा बढ़ जाता है, जो जानलेवा और लाइलाज बीमारी है।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

रायपुर

•

image

Shradha Jaiswal

•

Updated: 21 Apr 2026, 10:19 AM IST

रायपुर में एंटी रैबीज वैक्सीन की किल्लत, मरीजों की बढ़ी परेशानी, पूरा डोज नहीं मिलने से हो रही मौतें(photo-patrika)

रायपुर में एंटी रैबीज वैक्सीन की किल्लत, मरीजों की बढ़ी परेशानी, पूरा डोज नहीं मिलने से हो रही मौतें(photo-patrika)

Rabies vaccine shortage Raipur: छत्तीसगढ़ के रायपुर में सरकारी अस्पतालों में मुफ्त में मिलने वाली एंटी रैबीज वैक्सीन का स्टॉक कभी भी खत्म हो रहा है। इससे डॉग बाइट के शिकार लोगों की परेशानी बढ़ जाती है। कई बार पूरा डोज नहीं लगने से व्यक्ति रैबीज का शिकार हो जाता है। रैबीज का कोई इलाज नहीं है, ऐसे में मरीज की मौत हो जाती है। यही नहीं, यह फैलने वाली बीमारी होती है इसलिए रैबीज के मरीज को आइसोलेशन वार्ड में रखा जाता है।

Rabies vaccine shortage Raipur: सरकारी अस्पतालों में वैक्सीन खत्म

कुत्ते या किसी अन्य जानवर के काटने पर एंटी रैबीज के 5 डोज लगाए जाते हैं। यह टीका 0, 3, 7, 14 और 28वें दिन (शून्य का मतलब वैक्सीन लगने का पहला दिन) मांसपेशियों में लगाया जाता है। यदि व्यक्ति को पहले भी टीका लग चुका हो, तो केवल 2 डोज (0 और 3 दिन) की आवश्यकता होती है। डॉक्टरों के अनुसार 90 फीसदी रैबीज की बीमारी कुत्तों के काटने से होती है। हल्की खरोच भी खतरनाक हो सकती है। इसलिए न केवल आवारा, बल्कि पालतू कुत्तों से पर्याप्त सावधानी की जरूरत है।

डॉक्टरों के अनुसार राजधानी में सबसे ज्यादा 50 डॉग बाइट के केस आते हैं। इनमें 20 से 25 नए केस होते हैं। इन्हें एंटी रैबीज वैक्सीन लगाने की जरूरत पड़ती है। लेकिन सीजीएमएससी से पर्याप्त सप्लाई नहीं होने के कारण वैक्सीन खत्म हो जाती है। इससे लोगों को निजी अस्पतालों में जाकर वैक्सीन लगवानी पड़ती है।

मरीजों को जेब ढीली करनी पड़ रही

वहां एक डोज के लिए 300 से 500 रुपए तक खर्च करने पड़ रहे हैं। 55 वर्षीय व्यक्ति को एक कुत्ते ने काट दिया था। दो डोज लगाने के बाद वैक्सीन खत्म हो गई। निजी अस्पताल में भी एंटी रैबीज का डोज नहीं लगवाया। बाद में पता चला कि उसे रैबीज हो गया है। कुछ दिनों बाद उसने दम तोड़ दिया।

45 साल के एक व्यक्ति ने कुत्ते के काटने के बाद एंटी रैबीज वैक्सीन नहीं लगवाई। उसका व्यवहार कुत्ते जैसे होने लगा। वह पानी भी चाट-चाटकर पीता। अचानक डर जाता। अस्पताल में भर्ती कराया गया तो पता चला कि उन्हें रैबीज है। इलाज के दौरान मौत हो गई।

तत्काल नहीं दिखते लक्षण इसलिए सावधानी जरूरी

पागल कुत्ते व दूसरे जानवर के काटने के 30 दिनों से लेकर 90 दिनों तक, यहां तक कई केस में 6 वर्ष के भीतर मरीज में रैबीज के लक्षण देखे गए हैं। पानी से डरना यानी हाइड्रोफोबिया, प्रकाश से डरना मतलब फोटोफोबिया व हवा से डर यानी एयरोफोबिया रैबीज के प्रमुख लक्षणों में है। पीडि़त पानी को कुत्तों की तरह चाट-चाटकर पीता है। डॉक्टरों के अनुसार 14 इंजेक्शनों के बजाय अब मांसपेशियों में लगने वाली 5 वैक्सीन पर्याप्त है। जो पूर्णत: सुरक्षित व असरकारक है।

एसोसिएट प्रोफेसर मेडिसिन आंबेडकर अस्पताल के डॉ. सुरेश चंद्रवंशी ने कहा की कुत्तों के गहरे काटने से त्वचा, मांसपेशियां, नसें, हड्डियां भी क्षतिग्रस्त होने का खतरा बढ़ जाता है। रैबीज का खतरा न केवल आवारा, बल्कि पालतू कुत्तों से भी है। काटने के बाद तत्काल एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने की जरूरत होती है। घाव गंभीर हो तो इम्यूनोग्लोबुलिन सीरम लगवाएं। अपनी मर्जी से जड़ी-बूटी का उपयोग न करें। इससे बीमारी बढऩे का रिस्क बढ़ सकता है।