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जीएसटी के साइड इफेक्ट : विदेश से किया व्यापार, अब करोड़ों का रूका “वैट” रिफंड

- 60 दिनों में रिफंड का नियम, लेकिन 5 साल से परेशानी- वर्ष 2010 से 2017 तक 50 करोड़ से अधिक का बना है रिफंड- वैट पद्धति का रिफंड अटका

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अजय रघुवंशी @ रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार के वाणिज्यिक कर ने कहा कि मूल्य संवर्धित कर (वैट) सिस्टम के राज्य राज्य के 5000 से अधिक डीलरों का 50 करोड़ से अधिक का रिफंड 5 साल से रोक है। वस्तु और सेवा कर (जीएसटीआई) प्रणाली लागू होने के बाद वैट पद्धति खत्म कर दिया गया। जीएसटी लागू होने के एक साल बाद भी डीलर्स को वैट रिफंड नहीं मिला। वैट रिफंड के लिए आवेदन करने के 60 दिन के भीतर रिफंड देने का नियम है, लेकिन रिफंड के लिए डीलर्स की तारीखें में धूल खा रही है। में में रिफंड दबने की थोक शिकायतें, नौकरियां, तब कही जाकर भारत ने आनन-फानन में 5 सदस्यीय कमेटी का गठन किया। इसके बावजूद रिफंड में तेज नहीं आई। भारत की दलील है कि शिकायत के बाद उनसे पहले ऑपरेशन आवेदन मंगाए गए, लेकिन आवेदन करने वाले डीलरों की संख्या उम्मीद से कम हो रही है।

ज़रूरत नहीं है, फिर रहना दोबारा आवेदन
सेल टैक्स बार एसोसिएशन का कहना है कि 30 जून 2017 तक वैट अधिनियम के विवरण विवरण पत्र प्रस्तुत करना और फॉर्म -18 के आधार पर रिफंड की राशि बनती है, लेकिन भारत ने ऐसे व्यवसायियों को भुगतान नहीं किया है। रिफंड के लिए फिर से आवेदन करने की जरूरत है लेकिन नहीं है। इसके बावजूद उनसे आवेदन मंगाए गए।

विभागीय अधिकारी भी फंसे
डीलर्स द्वारा अधिक रिफंड मांगने और विभागीय अधिकारियों द्वारा अधिक रिफंड देने के मामले में विभागीय अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। इस मामले में बीट साल जांच-पड़ताल के लिए कमेटी बनाया गया था। अधिक रिफंड देने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई के साथ-साथ डीलर्स पर भी जुर्माना लगाने का निर्णय लिया गया है।

जीएसटी में प्रकरण नहीं
अधिकारियों का कहना है कि जीएसटी लागू होने के बाद रिफंड के मामले लंबित नहीं हैं। जीएसटी लागू होने के बाद लंबित प्रकरणों की संख्या काफी कम हो रही है। इधर सेल टैक्स बार एसोसिएशन के किनारे मुताबिक कई डीलर्स ने कहा में रिफंड नहीं मिल का मामला दायर किया गया है।

किसी को नहीं मिला ब्याज, फिर शिकायत
रिफंड नहीं मिल के मामले में बीट महीने सेल टैक्स बार सोसायशन ने वाणिज्यिक कर आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर तत्काल रिफंड देने की मांग की थी। एसओसिएशन ने कहा कि किशन फॉर्म -18 दाखिल किया गया है, उनका रिफंड नहीं मिल रहा है। नियमों के मुताबिक 60 दिन के भीतर रिफंड नहीं मिला 6 प्रतिशत प्रति वर्ष ब्याज के साथ रिफंड देने का प्रावधान है, लेकिन किसी भी ब्याज नहीं मिला।


ऐसे डीलर्स, मेन रिफंड लंबित है, उनके प्रकरणों का निराकरण किया जा रहा है। पुराने मामलों के निपटारे के निर्देश भी दिए गए हैं।

पी संगीता आयुक्त
वाणिज्यिक कर भारत

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