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‘गाड़ी वाला आया घर से कचरा निकाल’ के सिंगर बोले- जनता का प्यार ही अवॉर्ड

आपके दिन का आगाज़ जिस गीत को सुनकर होता है, क्या आप जानते हैं वे कहां के रहने वाले हैं और क्या करते हैं? आज हम आपको प्राइमरी के टीचर श्याम बैरागी से रूबरू करवा रहे हैं।

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'गाड़ी वाला आया घर से कचरा निकाल' के सिंगर बोले- जनता का प्यार ही अवॉर्ड

'गाड़ी वाला आया घर से कचरा निकाल' के सिंगर बोले- जनता का प्यार ही अवॉर्ड

रायपुर. काबिलियत किसी भौगोलिक परिस्थितियों की मोहताज नहीं होती। एमपी के मण्डला जिला कान्हा किसली के पास छोटा सा गांव है बेहारी। यहां जन्मे श्याम बैरागी के स्वर और लेखन की पुरवाई आज रायपुर के बाशिंदों की सुबह को खुशगवार बना रही है। जी हां, गाड़ी वाला आया घर से कचरा निकाल...स्वच्छता के प्रति जागरूकता का पर्याय बन चुका है। हमने इसके गीतकार और गायक श्याम बैरागी से मोबाइल पर बात कर इस गीत से जुड़े संस्मरण जाने।
ऐसे मिला ऑफर
2016 में मण्डला नगर पालिका के सीएमओ आरपी सोनी ने मुझे बुलाया। उस वक्त स्वच्छता अभियान की शुरुआत हुई थी। वे चाहते थे कि चलती गाड़ी में गाना बजे। साउंड सिस्टम से उस गीत को बजाएंगे ताकि लोग स्वच्छता के लिए जागृत हो सकें। मुखड़ा ऐसा हो कि लोग कचरे को लाकर गाड़ी में डालें। इस गीत को लिखने में मुझे महज 1 दिन का वक्त लगा। मैं 3 दशक से भी ज्यादा वक्त से लेखन के क्षेत्र से हूँ, लिहाजा इसे लिखने में कोई खास वक्त नहीं लगा।

सम्मान के लिए आवेदन क्यों?
मेरी पृष्ठभूमि राजनीतिक नहीं है। मैंने इस देश के लिए काम किया है। करोड़ों लोगों की जागरूकता में मेरी भूमिका रही है। मेरा मानना है कि आवेदन करके कोई सम्मान नहीं पाना चाहता। न सिर्फ मैं बल्कि देश के ग्रामीण क्षेत्रों में कई ऐसे कलाकार हैं जो देश के लिए काम करते हैं। सरकार संज्ञान लेकर खुद सम्मान करे तब उस अवॉर्ड की सार्थकता होगी। मेरे लिए असली सम्मान तो जनता का प्यार है जो लगातार मुझे मिल रहा है। जो लोग समाज में विशिष्ट काम करते हैं औऱ उनका बैकग्राउंड कमजोर है। ऐसे लोगों के लिए सरकार जीवनभर मानदेय तय करे। रायपुर की एक संस्था ने मेरा सम्मान किया था। वहां के आकाशदीप ने सबसे पहले मेरा वीडियो बनाया जो काफी चला।

ऐसे पहुंचा अन्य राज्यों तक
मंडला में जब यह गीत बजने लगा तो बहुत से लोग इसे सोशल मीडिया पर शेयर करने लगे। नगर पालिका के लोगों ने अपने साथियों के माध्यम से दूसरे जिले में भेजा। यूटुयूब चेनल स्याही दिल की डायरी में इसे पोस्ट किया जिसे 6 मिलियन व्यूव मिले। हालांकि ये अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर भी वायरल हुआ है। चूंकि मेरे पास कॉपीराइट नहीं था इसलिए कई चैनलों ने इसे पोस्ट किया। अधिकांश ने क्रेडिट भी दिया।

इन राज्यों में सुना जा रहा
जिला मुख्यालय से शुरू होकर ये गीत न केवल एमपी बल्कि छत्तीसगढ़, राजस्थान, बिहार, यूपी, गोवा और महाराष्ट्र होते हुए सुबह लोगों के कानों में मिश्री बनकर घुलने लगा। इतना ही नहीं, दुनिया के 22 देशों के लोगों ने इसे यूट्यूब पर देखा।