
Surya Rashi Parivartan 2022: सूर्यदेव अब बदलेंगे राशि, इस बार शेर पर सवार होकर आ रही मकर संक्रांति
रायपुर. Surya Rashi Parivartan 2022: पौष महीने की शुक्ल द्वादशी तिथि 14 जनवरी को है। इसी दिन सूर्यदेव (Sun God) अपनी धनु राशि बदलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे, तभी मकर संक्रांति (Makar Sankranti) का पर्व मनता है। विशेषता यह कि पर्व भले ही एक हो परंतु विविधता के रंग अनेक समाहित होते मकर संक्रांति पर्व में। समाज के लोग अपने-अपने रीति-रिवाज और परंपरा से मनाते हैं। पंडितों के अनुसार इस बार की संक्रांति इस मायने में खास है, क्योंकि शेर पर सवार होकर आ रही है, जो समृद्धि की प्रतीक है। परंतु कोराना का साया काम रहने से उल्लास फीका रहने की ही उम्मीद है।
मकर संक्रांति का विशेष फल पुण्य स्नान-दान से मिलता है। इसीलिए इस पर्व पर लोग पवित्र नदियों में डुबकी लगाने के लिए निकलते हैं। तिल, लड्डू और जरूरतमंदों के बीच कंबल दान करना फलदायी बताया गया है। मकर संक्रांति पर घर-घर चिउड़ा, दही, तिल लड्डू का भोग जरूर लगता है। अब मकर संक्रांति का पर्व नजदीक है।
इस पर्व के महत्व को देखते हुए राजधानी के महादेवघाट और शहर से 35 किमी दूर राजिम संगम में डुबकी लगाने के लिए मेला तो लगता है, परंतु अधिकांश लोग गंगाजी में डुबकी लगाने के लिए निकलते हैं। परंतु पिछले साल जैसा ही कोरोना की तीसरी लहर के कारण खतरा बढ़ता जा रहा है। फिर भी सप्ताह में चार दिन चलने वाली सारनाथ, नवतनवा जैसी ट्रेनों में प्रयाग राज जाने की तैयारी कर रहे लोग पहले से रिजर्वेशन करा रहे हैं। इसलिए इस दिशा की ओर जाने वाली ट्रेनों में वेटिंग लगातार बनी हुई है।
दोपहर में मकर राशि में प्रवेश, पुण्यकाल दिनभर
महामाया मंदिर के पंडित मनोज शुक्ला के अनुसार 14 जनवरी को दोपहर 2.28 बजे मकर राशि में सूर्य का प्रवेश होगा। परंतु पुण्यकाल दिनभर रहेगा। यानि सूर्य देव इसी दिन दक्षिण से उत्तर की और गमन यानी कि उत्तरायण होंगे। हिन्दू सनातन परंपरा में यह बहुत बड़ा पर्व है जिसे सूर्योपासना के रूप में देश में ही नहीं, बल्कि पड़ोसी देश नेपाल के साथ-साथ कई देशों में किसी न किसी रूप में मनाया जाता है। प्रकाशपुंज सूर्यदेव की पूजा करके ऊर्जा प्राप्त करने का महात्म्य पुराणों में वर्णित है।
मकर संक्रांति विविधताओं का पर्व
मकर संक्रांति विभिन्न रूपों में मनाया जाता है। विभिन्न प्रांतों में इस त्योहार को मनाने के जितने अधिक रूप प्रचलित हैं उतने किसी अन्य पर्व में नहीं है।
एक दिन पहले लोहड़ी जलेगी
एक दिन पहले 13 जनवरी को हरियाणा और पंजाब राज्य के मूल निवासी लोहड़ी जलाते हैं। यह नवदम्पत्तियों के लिए खास रहता है। अंधेरा होते ही घरों एवं गुरुद्वारों के सामने आग जलाकर अग्निदेव की पूजा करते हुए तिल, गुड़, चावल और भुने हुए मक्के की आहुति देकर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
पुण्य स्नान-दान का विशेष महत्व
सनातन परंपरा में पुण्य स्नान व दान के पर्व के रूप में मनता है। गंगा, यमुना व सरस्वती के संगम हर साल मेला लगता है। इसलिए 14 जनवरी से पहले इलाहाबाद अब प्रयागराज में हर साल माघ मेले की शुरुआत होती है। पतंगबाजी कर लोग उत्सव मनाते हैं।
महाराष्ट्र में तिल संक्रांति, सुहागिनों को सुहाग भेंट
महाराष्ट्र में तिल संक्रांति के नाम से मनाया जाता है। इस दिन सभी विवाहित महिलाएं अपनी पहली संक्रांति पर कपास, तेल व नमक आदि चीजें अन्य सुहागिन महिलाओं को दान करती हैं। तिल-गूल नामक हलवे के बांटने की प्रथा भी है। रायपुर महाराष्ट्र मंडल में दीप जलाकर उत्सव मनाते हैं।
दक्षिण भारतीय पोंगल मनाते हैं
मकर संक्रांति पर्व को दक्षिण भारतीय समाज पोंगल के रूप में मनाते हैं। इसी दिन राजधानी के टाटीबंध में अय्यप्पा स्वामी की पवित्र 18 सीढिय़ां खुलती हैं। लोग कूड़ा करकट इक_ा कर जलाते हैं। घरों में रंगोली सजाकर दीये रखते हैं। चार दिन उत्सव के तहत प्रथम दिन भोगी पोंगल, द्वितीय दिन सूर्य पोंगल, तृतीय दिन मट्टू पोंगल अथवा केनू पोंगल और चौथे दिन कन्या पोंगल। लक्ष्मी पूजा और पशुधन की पूजा करते हैं।
Published on:
05 Jan 2022 02:22 pm
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