15 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सुरता म : दानलीला के अमर कवि पं. सुन्दरलाल सरमा

पंडित सुन्दरलाल सरमा ह लेखक-कवि आय। आजादी बर लड़इया बड़े सपूत अउ गुरु घासीदासजी के समता के सिध्दांत ल बगरैया।पंडित सुन्दरलाल सरमा के इंतकाल 28 दिसंबर 1940 म होइस। तब छत्तीसगढ़ के सपना देखइया हमर पुरखा डॉ. खूबचंद बघेल 40 बछर के रिहिस। डॉ. साहब ह पंडित सुन्दरलाल सरमा के बताय रद्दा म चलके समता बर बड़े काम करिस।

2 min read
Google source verification
सुरता म : दानलीला के अमर कवि पं. सुन्दरलाल सरमा

सुरता म : दानलीला के अमर कवि पं. सुन्दरलाल सरमा

कै तुम हो बैगा हरी, डारेव टोना आय।
थोपना अइसन थोप के, मन ले गये चोराय।


ए दोहा ह दानलीला के आय। पंडित सुन्दरलाल सरमा के लिखे दानलीला जगभर म जाने जाथे। छत्तीसगढ़ के महान लेखक पंडित सुन्दरलाल सरमा ह ए दोहा म बैगा, थोपना, टोना जइसे जमीनी गंंवइहां भासा के उपयोग करे हे। बैगा छत्तीसगढ़ के गांव म होथे। झाड़-फूंक, हूम-धूप करइया, गांव के बिपत हरैया बइगा कहाथे। मंतर मारत बइगा ह जंवारा ठंडा कराय बर जोत के आघू झूपत चलथे। भगवान किसन कन्हैया ल हमर सुन्दरलालजी ह बइगा किहिस। अइसने बिसेस समझ, जानबा अउ लेख के कारन पंडित सुन्दरलाल सरमा के अतेक पूजा होथें।
1881 म उनकर जनम राजिम तीर के गांव चमसूर के मालगुजार जियालाल तिरपाठी के घर होय रिहिस। पंडितजी महात्मा गांधी के उम्मर के रिहिस। महात्मा गांधी के काम ल तो सबो जानके गांधीवादी बनिन, फेर गांधीजी के समता एकता के सिद्धांत ल जमीन म उतारिन। हमर सुन्दरलाल महराज ह। दलितमन ल मंदिर म लेगिस। छोटे-बड़े के भेद मेटाय बर अपन समाज के रिस ल झेलिस। फेर, गांधीजी ह वोला सनमान देके उंच पिड़हा दिस। ऐहा बड़े सम्मान आय। उही पंडित सुन्दरलाल सरमा के नाव म छत्तीसगढ़ सरकार हा दू लाख के बड़े सनमान हर बछर देथे।


केहे गे हे जउन ह दूसर के सनमान बर संसो करही, दुनिया वोकर सनमान के फिकर करथे। ए बात सच ए। पंडित सुन्दरलाल सरमा ह सबके सनमान के संसो करिस त उंकर नाव के सनमान छत्तीसगढ़ म दे जाथे। साहित्य लिखइयामन ल दे जाने वाला ऐहा बडक़ा सनमान ए। ए सनमान ल सुरू करके छत्तीसगढ़ सरकार ह छत्तीसगढ़ी साहित्य के मान बढ़इयामन ला माथ नवइस।


पंडित सुन्दरलाल सरमा ह लेखक-कवि आय। आजादी बर लड़इया बड़े सपूत अउ गुरु घासीदासजी के समता के सिध्दांत ल बगरैया।पंडित सुन्दरलाल सरमा के इंतकाल 28 दिसंबर 1940 म होइस। तब छत्तीसगढ़ के सपना देखइया हमर पुरखा डॉ. खूबचंद बघेल 40 बछर के रिहिस। डॉ. साहब ह पंडित सुन्दरलाल सरमा के बताय रद्दा म चलके समता बर बड़े काम करिस।


पूरा पीढ़ी ल पंडित सुन्दरलाल सरमा ह समाज अउ देस सेवा के संग साहित्य के सेवा बर सीख दिस। आगू बढऩा सिखोइस। रद्दा बतइस। 1898 से 1912 के बीच चौदह बछर म पंडित सुन्दरलाल सरमा ह बाइस पुस्तक लिखिन।
जब छत्तीसगढ़ी म लिखे के हिम्मत बड़े बड़े लिखइयामन ल नइ होवत रिहिस तब हिन्दी संस्करीति के ग्याता 1898 से 1912 के बीच ह सरलग छत्तीसगढ़ी म लिखिस। छत्तीसगढ़ के संस्करीति, परंपरा के अइसन रंग चढ़इस दानलीला म के किसन भगवान ह हमर छत्तीसगढ़ के ग्वाला सहीं लागे ल धरलिस। छत्तीसगढ़ म ग्वाला-ग्वालिन ल राउत- रउतइन केहे जाथे। दानलीला म पंडित सुन्दरलाल लिखे हे-
आपन-आपन दही निकारिन
रउताइन मन परसे लागिन।
मोहन खावै सखा खवावय
कइसे कहौं कहत नइ आवय।


पंडित सुन्दरलाल सरमा के सुरू के पढ़ई राजिम म होइस। अंगरेजी, संस्करीति, बंगला, मराठी, उडिय़ा भासा के गियान उनला रिहिस। देस के आजादी के लड़ई म कई बखत जेल गिन। रायबहादुर हीरालालजी ह दानलीला के कवि सुन्दरलालजी ल छत्तीसगढ़ी के पहला पो_ कवि माने हे। ए बात ल दानलीला के भूमिका म आपमन लिखे हें।


सरमाजी ह 1905-06 ले राजनीति अउ समता के आन्दोलन म भाग लिन। उही 1905 म हीरालालजी काव्योपाध्याय ह छत्तीसगढ़ी बियाकरन लिखिस। वो समे राहय जब अलग-अलग छेत्र म विद्वान सपूतमन काम करंय अउ सबो के बड़े काम के महत्तम ल जानंय-समझंय। छत्तीसगढ़ के रंग-ढंग, बोली-भासा के जउन कमाल दानलीला म सुन्दरलालजी करे हे वोकर मुकाबला करना कठिन हे। चलती-फिरती बात, छत्तीसगढ़ी भासाके चुनिंदा मुहावरामन के उपयोग ह देखते बनथे।छत्तीसगढ़ म कहां जाथस राम, कहां ले आए राम इहू कथन होथे। रमरमिहामन के परभाव घलो ऐमा दिखथे।