राम जन्म भूमि ट्रस्ट से मुझे कॉल आई कि पांच वर्ष के भगवान राम का स्केच बनाना है, जिसमें चेहरे पर मुस्कुराहट हो। यह चुनौतीपूर्ण था क्योंकि भगवान कृष्ण के बहुत सारे बाल रूप देखने मिलते हैं, लेकिन राम के नहीं। चित्र भेजने के बाद दूसरे दिन फोन आया कि कमेटी ने आपका बनाया स्केच पसंद किया है। जबकि देशभर से 85 अन्य चित्रकारों से स्केच मंगवाए थे। कुछ सुधार मुझे बताए गए जैसे तरकश और जनेऊ नहीं बनाने थे। करेक्शन के साथ मैं फिर वहां गया। मेरे अलावा दो और चित्रकार स्केच लेकर पहुंचे थे। यह बताया रामलला का स्केच बनाने वाले सुनील विश्वकर्मा ने। वे कहते हैं कि मैं बचपन से ही रामजी के चित्र बनाया करता था, आज वे ही मेरी पहचान बन गए हैं।