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अब स्कूलों में भी नरवा, गरुवा, घुरवा और बारी पढ़ाने की तैयारी

- स्कूल शिक्षा मंत्री प्रेमसाय सिंह टेकाम ने दिए संकेत- 46वीं जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रदर्शनी में जैविक खेती, स्वच्छता और संचार पर दर्शक देखेंगे १४७ मॉडल- १५ अक्टूबर को राज्यपाल करेगी प्रदर्शनी का शुभारंभ

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 School students yearning for drinking water problem

School students yearning for drinking water problem

रायपुर.

राज्य सरकार की अति महत्तवकांक्षी योजना नरवा, गरुवा, घुरवा और बाड़ी को अब स्कूलों पाठ्यक्रम में भी शामिल करने की तैयारी की जा रही है। स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने शनिवार को बीटीआई ग्राउंड स्थित राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद(एससीईआरटी) में पत्रकार वार्ता के दौरान इस बात के संकेत दिए। यह प्रदर्शनी में भी आकर्षण का केंद्र होगा। इसके अलावा मल्टी मीडिया पाठ्यपुस्तकें, एससीईआरटी प्रकाशन की किताबें, दीक्षा पोर्टल की प्रदर्शनी होगी। गौरतलब है कि नरवा, गरुवा, घुरवा और बाड़ी प्रदेश सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट है और इसे अन्य राज्यों ने भी सराहा है। कृषि एवं जैविक खेती, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, संसाधन प्रबंधन, अपशिष्ट प्रबंधन और परिवहन व संचार से संबंधित देशभर से 147 मॉडल ४६वीं जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रदर्शनी में १५ से २० अक्टूबर तक बीटीआई ग्राउंड में प्रदर्शित किए जाएंगे। छत्तीसगढ़ दूसरी बार जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय विज्ञान, गणित और पर्यावरण की प्रदर्शनी की मेजबानी कर रहा है। इससे पले वर्ष २००५ में प्रदेश को प्रदर्शनी की मेजबानी करने का मौका मिला था। प्रदर्शनी का उद्घाटन 15 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे राज्यपाल अनुसुइया उइके करेंगी। पत्रकार वार्ता में राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद(एससीईआरटी) के संचालक पी दयानंद, अतिरिक्त संचालक डॉ. सुनीता जैन, संयुक्त संचालक डॉ. योगेश शिवहरे मौजूद थे।एनसीईआरटी के सहयोग से प्रदर्शनीकांफ्रेस के दौरान एससीईआरटी के संचालक पी दयानंद ने बताया कि प्रदर्शनी का आयोजन एनसीईआरटी के सहयोग से हो रहा है। छात्रों के अंदर के ज्ञान और नवाचार की क्षमता को जानने के लिए इस तरह का आयोजन किया जाता है। प्रदर्शनी में एनसीईआरटी दिल्ली का सहयोग मिला है। दिल्ली की टीम प्रदर्शनी के दौरान प्रदेश प्रवास पर आएगी। बच्चों के पाठ्यक्रम में भी नरवा,गरुवा, घुरवा और बाड़ी को शामिल किया जाएगा।