
लोककला पंडवानी तीजनबाई (photo source- Patrika)
लक्ष्मी विश्वकर्मा/Women's Day Special: छत्तीसगढ़ की लोककला पंडवानी को देश-दुनिया में पहचान दिलाने वाली महान गायिका तीजन बाई इन दिनों जीवन के सबसे कठिन दौर से गुजर रही हैं। मंच पर महाभारत के युद्ध को अपनी अद्भुत आवाज और अभिनय से जीवंत करने वाली 69 वर्षीय तीजन बाई अब बीमारियों से जूझ रही हैं। बीते पांच महीनों से वे बिस्तर पर हैं। प्रोटीन पॉवडर और फलों के भरोसे हैं। महिला दिवस के मौके पर उनका जीवन एक ऐसी प्रेरक कहानी बनकर सामने आता है, जिसमें संघर्ष कभी खत्म नहीं हुआ।
दुर्ग जिले के गनियारी स्थित अपने गांव में वह डॉक्टरों की निगरानी में हैं, जहां जिला प्रशासन के निर्देश पर रोजाना मेडिकल टीम पहुंचकर बीपी और शुगर की जांच कर रही है। बोलने और सामान्य भोजन करने में दिक्कत हैं। देश के तीन प्रमुख नागरिक सम्मानों से सम्मानित तीजन बाई मंच की तरह जिंदगी की इस जंग में भी हिम्मत से डटी हैं। परिवार से मिली जानकारी के मुताबिक हॉस्पिटल में एडमिट होने से वह मना करती हैं और परिवार के साथ घर पर ही रहना पसंद कर रही हैं। तीजन का जन्म पाटन तहसील के ग्राम अटारी में हुआ था। इसके बाद भिलाई स्थित गनियारी उनकी कर्मभूमि रही।
तीजन बाई के संघर्ष और सफलता की कहानी पर एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाई जा रही है। बॉलीवुड के कलाकारों से सजी टीम ने तीन महीने पहले भिलाई स्थित गनियारी गांव में 40 दिन की शूटिंग पूरी कर ली है। परिवार को इस उपलब्धि के लिए एक साइनिंग अमाउंट भी दिया गया है। तीजन बाई के बचपन की भूमिका गांव की ही एक लड़की ने निभाई है।
13 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपना पहला मंच प्रदर्शन किया। उस समय महिला गायिकाएं केवल बैठकर पंडवानी गा सकती थीं, जिसे वेदमती शैली कहा जाता है। पुरुष खड़े होकर कपालिक शैली में गाते थे। तीजन बाई पहली महिला थीं जिन्होंने कपालिक शैली में प्रदर्शन किया। एक दिन ऐसा भी आया जब प्रसिद्ध रंगकर्मी हबीब तनवीर ने उन्हें सुना और तबसे तीजनबाई का जीवन बदल गया। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से लेकर अनेक अतिविशिष्ट लोगों के सामने देश-विदेश में उन्होंने अपनी कला का प्रदर्शन किया।
तीजन बाई के साथ लोककला में साथ रहने वाले मनहरण सारवा बताते हैं कि गरीबी, संघर्ष और समाज की बंदिशों के बीच उन्होंने पंडवानी को अपनाया। उस समय यह कला पुरुषों के वर्चस्व वाली मानी जाती थी, लेकिन तीजन बाई ने अपनी जिद, मेहनत और प्रतिभा से इस सोच को बदल दिया। बिना किसी औपचारिक शिक्षा के उन्होंने महाभारत की कहानियों को अपने अनोखे अंदाज में ऐसे प्रस्तुत करती थीं कि श्रोता मंत्रमुग्ध हो जाते थे। महान कलाकार अब बिस्तर पर हैं और बहुत कम बोल पाती हैं। अधिकतर बातें इशारों में ही कहती हैं।
पंडवानी गायिका के परिवार में एक बेटा और बहनों का परिवार देख-रेख में जुटा है। उनकी बहन की बहू रेणु ने बताया कि राज्योत्सव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फोन कर हाल-चाल पूछा था। साथ ही बेहतर स्वास्थ्य के लिए सरकार को निर्देश दिए थे।
तीजनबाई का परिचय
जन्म: 24 अप्रैल 1956
पुरस्कार: पद्मश्री (1988), पद्मभूषण (2003), पद्मविभूषण (2019), संगीत नाटक अकादमी (1995), फुकुओका पुरस्कार (2018), जापान सरकार द्वारा अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार
गांव: गनियारी, जिला दुर्ग (छत्तीसगढ़)
पहचान: पंडवानी की विश्व प्रसिद्ध गायिका
खासियत: महाभारत की कथाओं को अभिनय और गायन के साथ मंच पर जीवंत प्रस्तुति
Updated on:
08 Mar 2026 08:26 am
Published on:
08 Mar 2026 08:25 am
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