
संग्रहालय के इतिहास पर दीमकों ने किया हमला (Photo Patrika)
International Museum Day: अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस से ठीक पहले राजधानी स्थित देश के टॉप 10 में शामिल महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय से बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। संग्रहालय में सुरक्षित पुरावशेषों की 6 पंजियों में से 5 पंजियां दीमकों के कारण नष्ट हो चुकी हैं। इन पंजियों में दुर्लभ धातु प्रतिमाओं, कलाकृतियों और पुरावशेषों के रेकॉर्ड दर्ज थे। मामले ने संग्रहालय की सुरक्षा और संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह खुलासा संग्रहालय के तत्कालीन प्रभारी और सहायक संचालक डॉ. जे.आर. भगत द्वारा संचालक पुरातत्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय को भेजे गए पत्र से हुआ है। पत्र के मुताबिक डबल लॉक कमरे को खोला गया, जहां पुरावशेषों की पंजियां रखी गई थीं। कमरे के खुलते ही पाया गया कि ऊपर रखी कुल 6 पंजियों में से 5 अंदर से पूरी तरह दीमकों से खराब हो चुकी हैं, जबकि केवल एक पंजी सुरक्षित बची है।
मामले की जानकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को दी गई तथा फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी कराई गई। बताया गया कि जिन दुर्लभ वस्तुओं का रिकॉर्ड इन पंजियों में था, वे संग्रहालय की महत्वपूर्ण धरोहर मानी जाती हैं।
इधर विभाग ने मामले को गंभीर मानते हुए तत्कालीन प्रभारी डॉ. जे.आर. भगत को नोटिस जारी किया है। विभाग की ओर से पूछा गया है कि रिकॉर्ड की देखरेख की जिम्मेदारी उनके पास थी तो उन्होंने इससे पहले कब-कब निरीक्षण किया था और दीमक लगने की जानकारी समय पर क्यों नहीं मिली।
चार-पांच दिन पहले ही मुझे इसकी जानकारी मिली है। इन पंजियों की मूल प्रतियां भोपाल स्थित पुरातत्व अभिलेखागार एवं संग्रहालय में मौजूद हैं लेकिन राज्य गठन के बाद भी उनकी वापसी नहीं हो सकी। भोपाल से दस्तावेज आते ही सभी का डिजिटलाइजेशन किया जाएगा।
-राजेश अग्रवाल, मंत्री पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व
महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय से वर्षों पहले चोरी हुई दुर्लभ बौद्ध प्रतिमा अब भारत वापस लौटने की तैयारी में है। जानकारी के मुताबिक यह प्रतिमा अमरीका से दिल्ली भेजी जा चुकी है और जल्द ही रायपुर लाई जाएगी। यह प्रतिमा 8-9वीं सदी की मानी जाती है और सिरपुर क्षेत्र से प्राप्त हुई थी। संग्रहालय के अभिलेखों के अनुसार यह पद्मपाणि बोधिसत्व (अवलोकितेश्वर) की कांस्य प्रतिमा है, जिसकी ऊंचाई करीब 24.5 सेंटीमीटर बताई गई है। प्रतिमा अपने कलात्मक स्वरूप और ऐतिहासिक महत्व के कारण संग्रहालय की महत्वपूर्ण धरोहरों में शामिल रही है।
पुराने अभिलेखों में उल्लेख है कि प्रतिमा रायपुर के वकील सुखनंदलाल अग्रवाल के संग्रह से प्राप्त हुई थी। इसमें पद्मपाणि को अलंकृत चौकी पर दर्शाया गया है, जिसके सामने दो सिंह बने हुए हैं। प्रतिमा में कमल, आभूषण और जटा पर अंकित बुद्ध प्रतिमा जैसी विशेष कलात्मक आकृतियां मौजूद हैं। इस संबंध में पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा, यह हमारा सौभाग्य है कि चोरी हुई मूर्ति वापस आ रही है। जैसे ही मूर्ति दिल्ली स्थित संस्कृति मंत्रालय पहुंचेगी, उसे रायपुर लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
Published on:
18 May 2026 12:00 pm
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