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इस तहसील को जिला बनाने चुनाव में चलाई मुहिम, अब इसलिए बंद पड़ी

एक दशक पुरानी मांग पूरी नहीं

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इस तहसील को जिला बनाने चुनाव में चलाई मुहिम, अब इसलिए बंद पड़ी

इस तहसील को जिला बनाने चुनाव में चलाई मुहिम, अब इसलिए बंद पड़ी

भानुप्रतापपुर. बस्तर जिले की सात तहसीलों को जिला बनाया जा चुका है। हर क्षेत्र से सम्पन्न होने के बावजूद भानुप्रतापपुर अब तक जिला नहीं बन पाया है। उपचुनाव के दौरान जिले का मुद्दा जोर सोर से उठाया गया था। हर दुकान चौक चौराहों पर जिला नहीं तो वोट नहीं के पोस्टर लगे थेए लेकिन चुनाव सम्पन्न हो जाने के बाद जिले का मुद्दा पूरी तरह से ठंडा पड़ चुका है। पूर्व विधायक स्वण् मनोज मंडावी द्वारा प्रदेश में कांग्रेस सरकार आने पर भानुप्रतापपुर को जिला बनाने की घोषणा की गई थी। वहीं उपचुनाव के दौरान क्षेत्र के लोगों ने उम्मीद जगी कि कांग्रेस सरकार स्वण् मंडावी के सपने को पूरा कर भानुप्रतापपुर को जिला बनाने की घोषणा करेगीए लेकिन उपचुनाव में भी जनता ने स्वयं को ठगा महसूस किया।
जिला बनाओ संघर्ष समिति द्वारा भानुप्रतापपुर को जिला बनाने की मांग लेकर कई बार ज्ञापनए धरना प्रदर्शन व चक्काजाम किया जा चुका ह, लेकिन शासन प्रशासन से संतोषजनक आश्वासन नहीं मिला। पिछले कुछ माह से जिला बनाने का मुद्दा ठंडा पड़ा है। अविभाजित बस्तर में अस्सी के दशक में मात्र आठ तहसीलें थीं, जिनमें कांकेर, भानुप्रतापपुर, कोंडागांव, नारायणपुर, जगदलपुर, दंतेवाड़ा, कोटा तथा बीजापुर थी। जिनमें भानुप्रतापपुर को छोडक़र एक-एक कर सात तहसीलों को जिले का दर्जा मिल चुका है। वन और खनिज संपदा से प्रचुर भानुप्रतापपुर क्षेत्र में दो वन मंडल कार्यालय स्थित हैं। यहां के तेंदूपत्ता की गुणवत्ता भारत में प्रसिद्ध है। बीड़ी उत्पादन में इसका महत्वपूर्ण योगदान है। यहां की चिरोंजी और अमचूर देश में मांग रहती है। क्षेत्र में लौह अस्यक की प्रचुरता हैए इसलिए कई माइंस संचालित हैं। कई ट्रक व्यवसायियों एवं स्थानीय मजदूरों के रोजगार जुड़े हुए हैं। जिला बनाने का मुद्दा केवल चुनाव के समय क्यों चर्चा में रहता है। इसके पीछे कुछ राजनीतिक दल या व्यक्तियों का हाथ है जो निजी स्वार्थ पूर्ति के लिए ऐसा करते हैं। यह विचारणीय है। भानुप्रतापपुर भौगोलिक दृष्टि से खनिजए वन संपदा और तहसील मुख्यालय की दूरी के हिसाब से जिला बनने के अनुकूल है। समय.समय पर जिले की मांग लेकर कई छोटे बड़े प्रयास हुए पर भानुप्रतापपुर को जिला नहीं बनाया जा सका। भानुप्रतापपुर को नया जिला बनाया जाता तो 5 ब्लॉक भानुप्रतापपुर, अंतागढ़, कोयलीबेड़ा, दुर्गूकोंदल के अलावा पखांजूर को भी नया ब्लॉक बनाकर शामिल किया जा सकता है। विकासखंडों की दूरी भानुप्रतापपुर से 35 से 80 किमी के दायरे में है। जबकि कांकेर जिला मुख्यालय पहुंचने कोयलीबेड़ा के अलावा बांदे क्षेत्र के लोगों को 150 किमी का सफर करना पड़ता है। यदि सभी क्षेत्र के लोग मिलकर प्रयास करते तो अब तक भानुप्रतापपुर को जिले का दर्जा मिल चुका होता। भानुप्रतापपुर के अलावा अंतागढ़ क्षेत्र से भी जिले की मांग उठ रही है। शासन को निर्णय लेने में कठिनाई हो रही है।
भानुप्रतापपुर में जिला स्तरीय यह हैं कार्यालय: भानुप्रतापपुर को जिला बनाने के पहले से बहुत से जिला स्तरीय कार्यालय संचालित हो रहे हैं। जिसमें पिच्छेकट्टा में जिला जेलए पीडब्ल्यूडी कार्यालयए प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना कार्यालय, वन विभाग के दो वनमंडलाधिकारी कार्यालय, आदिवासी विकास परियोजना कार्यालयए विद्युत कार्यालय, जिला अतिरिक्त सत्र न्यायालयए पशु विभाग का तरल नत्रजल संयंत्र नाइट्रोजन प्लांट आदि प्रमुख हैं। इसी तरह अंतागढ़ में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कार्यालय व अतिरिक्त कलेक्टर कार्यालय का संचालन प्रारम्भ हो गया है। ऐसे में सवाल उठ रहा कि आखिर जिला कौन बनेगा,भानुप्रतापपुर या अंतागढ़, रेल सुविधा प्रारम्भ हो गई है। अन्य जिले व राज्य से सडक़ों का संपर्क भानुप्रतापपुर का अच्छा है। यहां आवागमन के साथ ही ठहरने व भोजन की भी उत्तम व्यवस्था है जो अंतागढ़ में नहीं है।