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छत्तीसगढ़ के ‘गांधीÓ पवन दीवान का सपना अधूरा

संत पवन दिवान के धर्म नगरी राजिम को जिला बनाने की सपने आज भी अधूरे है। सन् 1977 में एक नारा पूरे देश भर में खूब गूंजा था, जो आज भी लोगों के दिलों में है। वह पंक्ति थी पवन नहीं यह आंधी है, छत्तीसगढ़ का गांधी है।

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छत्तीसगढ़ के 'गांधीÓ पवन दीवान का सपना अधूरा

छत्तीसगढ़ के 'गांधीÓ पवन दीवान का सपना अधूरा

कोपरा. संत पवन दिवान के धर्म नगरी राजिम को जिला बनाने की सपने आज भी अधूरे है। सन् 1977 में एक नारा पूरे देश भर में खूब गूंजा था, जो आज भी लोगों के दिलों में है। वह पंक्ति थी पवन नहीं यह आंधी है, छत्तीसगढ़ का गांधी है।
इस संत ने छत्तीसगढ के विकास, उत्थान एवं जन सेवा में हमेशा आगे बढ़ चढ़कर काम किया। जिन्हें आज भी लोग याद कर रोमांचित हो जाते हैं। संत कवि पवन दीवान ने छत्तीसगढ़ राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करते हुए पृथक छत्तीसगढ़ की मांग को जोर-शोर से उठाया। नतीजतन सन 2000 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के भाजपा शासन काल में मध्यप्रदेश से अलग कर छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण हुआ था।
इसके पश्चात उन्होंने राजिम को जिला बनाने की मांग उठाते रहे। तब धार्मिक जिला बनाने की बात उभर कर सामने आए। इस पर दीवान ने साफ कहा था कि हमने आज तक कहीं कोई धार्मिक जिला नहीं सुना है। वह पूर्ण राजस्व जिला की मांग पर अड़े रहे। सन् 2014 में उनके स्वर्गवास के बाद जिला की मांग सुस्त पड़ गई थी। हालांकि आम जनता राजिम को जिला बनाने के लिए मांग करते आ रहे हैं। लेकिन यह मांग शासन प्रशासन तक शायद अभी तक नहीं पहुंची है।
राजिम शहर त्रिवेणी संगम के तट पर स्थित है। जो धार्मिक, सांस्कृतिक, व्यापारिक एवं राजनीतिक नगरी होने के बाद भी जिला का नहीं बन पाना यहां के लोगों को आज भी खल रहा है। क्षेत्र के लोगो का मानना है कि निहायत ही राजिम का जिला बनना बहुत जरूरी है। व्हाट्सऐप, फेसबुकए ब्लॉग पर इन दिनों राजिम को जिला बनाने की मांग जोरों पर है।
अंचल के रेख साहू इस विषय पर लिखते हैं कि राज्य निर्माण के समय से ही राजिम को जिला बन जाना चाहिए था। परंतु विडंबना है आज तक इस धार्मिक नगरी जिला नहीं बन पाया है। तत्कालीन सरकार से अनुरोध है कि राजिम को जिला बनाकर पवन दीवान के सपनों को पूरा करें। इसी तरह से तुला साहू, राज बांधे, लीलेंद्र कुमार, महेश मांडले, मुकेश साहू, संतोष सोनकर, भीखम सोनकर आदि ने कहा कि राजिम का इतिहास स्वर्णिम पन्नों में अंकित है। जहां तीन नदियों का संगम में प्रतिवर्ष कुंभ मेला लगता है। जो एक पवित्र नगरी को शीघ्र जिला बनना चाहिए। लेकिन अभी तक प्रशासन के द्वारा इस संबंध में कोई सकारात्मक कार्य नहीं हुए हैं। मात्र लोग सोशलए प्रिंटए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के द्वारा अपनी बात सरकार तक पहुंचाने में लगे हुए हैं। परंतु कोई ठोस परिणाम अभी तक सामने नहीं आए हैं।
धार्मिक मामले पर देशभर के लोग यहां के मंदिरों में दर्शन संगम में स्नान आदि के लिए बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। लोगों का स्पष्ट कहना है कि जिला बनने से न सिर्फ शहर का बल्कि ग्रामीण इलाकों का भी तेजी के साथ विकास होगा।
पूरा करने वाला अभी तक कोई नहीं मिला
उनके प्रमुख तीन सपनों में पहला छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण हो गया। दूसरा मां कौशिल्या की जन्मभूमि चंद्रखुरी को विकसित करने की थी। जिन्हें मुख्यमंत्री भूपेश बघेल लगातार यहां विकास की कहानी गढ़ रहे हैं। वहीं तीसरा राजिम को जिला बनाना, जिस पर अभी तक कोई काम नहीं हुआ है। जिनके सपनों को पूरा करने वाला अभी तक कोई नहीं मिला है। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के साथ ही 16 जिला से अब 32 जिला हो गए और उसमें अभी तक राजिम का क्रम नहीं आया है। क्षेत्रवासियों के लिए चिंता का विषय बन गया है।