
रायपुर का हाल: भाईगिरी का शौक, 49 युवक बन गए गुंडे-बदमाश और हिस्ट्रीशीटर
रायपुर. शहर में भाईगिरी का शौक रखने वाले युवक मामूली बातों में भी चाकूबाजी, गुंडागर्दी, रंगदारी और वसूली करने लगे। बदमाशों के संगत में रहकर मारपीट और धमकी-चमकी करते-करते गुंडा-बदमाश और हिस्ट्रीशीटर घोषित हो गए। पुलिस ने वर्ष 2021 में 42 युवकों को गुंडा-बदमाश की लिस्ट में शामिल किया है और 7 लोगों को निगरानी बदमाश घोषित किया है। इस तरह पिछले साल राजधानी में कुल 49 नए गुंडे-बदमाश और हिस्ट्रीशीटर बने हैं। शहर में करीब 200 गुंडे-बदमाश और हिस्ट्रीशीटर सक्रिय हैं।
नशे की लत बना रहा अपराधी
पुलिस के गुंडे-बदमाश और हिस्ट्रीशीटर की लिस्ट में शामिल 90 फीसदी अपराधी नशे की लत और रंगदारी के चलते क्राइम की दुनिया में आ गए हैं और धीरे-धीरे आदतन बदमाश बन गए। शराब पीने व अन्य नशा करने के लिए लोगों से रंगदारी करने लगे। पैसे देने से मना करने वालों को चाकू मारने या अन्य तरीके से मारपीट करते हुए डराने लगे। अब इनमें से कई हिस्ट्रीशीटर नशा और जुए-सट्टे के अवैध कारोबार में घुस गए हैं।
नहीं हो रही मॉनिटरिंग
करीब साल भर पहले पुलिस ने गुंडे-बदमाशों और हिस्ट्रीशीटरों की हर थानों में नए सिर से लिस्ट बनाने और उनकी लगातार मॉनिटरिंग की शुरुआत की थी। गुंडे-बदमाशों और हिस्ट्रीशीटरों के वर्तमान कामकाज, आय का स्त्रोत, परिजनों का मोबाइल नंबर आदि डाटा भी थानों में अपडेट करना था। लेकिन अधिकांश थानों में अपराधियों की मॉनिटरिंग नहीं हो रही है और न ही उनके वर्तमान गतिविधियों के बारे में भी रेकार्ड रखा जा रहा है।
मौका मिलते ही करते हैं अपराध
कुछ दिन पहले कोतवाली इलाके के हिस्ट्रीशीटर मुकेश बनिया ने एक युवक को बीच रास्ते में रोककर चाकू मार दिया था। मुकेश के खिलाफ कई अपराध हैं और गांजा व सट्टे के कारोबार में भी सक्रिय है। पुलिस उसे पकड़ नहीं पाई है। इसी तरह तेलीबांधा इलाके का अज्जू सिंधी भी इसी तरह के कारोबार में है। विधानसभा इलाके में जमन और उसका भाई यासीन अली भी सक्रिय हो गए हैं।
Published on:
03 Feb 2022 01:47 am

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