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पंचायतों को पता नहीं, खदानों को सरकारी जमीन देने की प्रक्रिया तेज

- सरगुजा में उदयपुर तहसीलदार ने ग्राम सभाओं से मंगाई सहमति- परियोजना के विरोध में पिछले 67 दिनों से धरने पर हैं ग्रामीण

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पंचायतों को पता नहीं, खदानों को सरकारी जमीन देने की प्रक्रिया तेज

पंचायतों को पता नहीं, खदानों को सरकारी जमीन देने की प्रक्रिया तेज

रायपुर. राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम को आवंटित परसा कोल ब्लॉक के लिए प्रभावित गांव की सरकारी जमीनों के आवंटन की प्रक्रिया तेज हो गई है। अधिसूचित आदिवासी क्षेत्र में ग्राम सभाओं की सहमति की अनिवार्यता को देखते हुए पूरी कार्रवाई चुपचाप की जा रही है।

सरगुजा जिले के उदयपुर तहसीलदार ने 20 नवम्बर की तारीख में ग्राम पंचायत साल्ही, फत्तेपुर आदि के सरपंचों और सचिवों को नोटिस जारी कर गांव में मौजूद सरकारी भूमि को परसा परियोजना के लिए आवंटित करने के लिए सहमति का प्रस्ताव मंगाया है। नोटिस के मुताबिक यह प्रस्ताव 9 दिसम्बर तक तहसील न्यायालय में पहुंच जाना था। ग्रामीणों को इस सरकारी प्रक्रिया की जानकारी शुक्रवार को हुई।

साल्ही गांव के रामलाल करियाम ने बताया, उन लोगों को दूसरे माध्यमों से इसकी जानकारी मिली। सरपंच रनिया बाई के प्रतिनिधि सेवाराम पोर्ते ने गांव वालों के सामने ऐसे किसी नोटिस की जानकारी से इन्कार किया है। इसको लेकर गांव में हंगामा मचा हुआ है। नोटिस के मुताबिक साल्ही पंचायत में साल्ही गांव की 14.130 हेक्टेयर और हरिहरपुर गांव की 7.289 हेक्टेयर सरकारी जमीन राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम को आवंटित किया जाना है। हालांकि उदयपुर तहसीलदार ने ऐसी आशंकाओं से इन्कार किया है।

तहसीलदार सुभाष शुक्ला ने कहा, खदान क्षेत्र के गांवों का गणना पत्रक तैयार कराया जा रहा है। यह मामला उनके न्यायालय में है। ऐसे में पंचायतों को पक्ष रखने का मौका दिया गया है। हो सकता है कि किन्हीं वजहों से उन्हें नोटिस न मिली हो। नहीं भी मिला है तो ग्राम पंचायत उनके न्यायालय में आकर अपना पक्ष रख सकती है। इस खदान को विकसित करके संचालित करने का ठेका अडानी समूह के पास है। बता दें कि परसा कोल ब्लॉक सहित हसदेव अरण्य क्षेत्र की दूसरी खनन परियोजनाओं के विरोध में कई गांवों के लोग पिछले 67 दिनों से सरगुजा के फत्तेपुर गांव में धरने पर बैठे हैं। उनकी दीवाली भी धरने पर बीती है।

फर्जी ग्राम सभा का खौफ
नोटिस की जानकारी सामने आने के बाद ग्रामीण फर्जी ग्राम सभा की आशंका जता रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि परसा कोल ब्लॉक की पर्यावरणीय अनुमति के लिए भी कंपनी ने ग्रामसभा की सहमति के दस्तावेज लगाए हैं, लेकिन ऐसी कोई ग्रामसभा हुई ही नहीं है। सरपंचों ने बाकायदा कलेक्टर से इसकी शिकायत की है।