
नीलगिरी की नई किस्म से नहीं गिरेगा जलस्तर, 36 हजार एकड़ में रोपेंगे पौधे
दिनेश यदु @ रायपुर. सदियों से नीलगिरी पेड़ (eucalyptus tree) को लेकर लोगों में एक अवधारणा बनी हुई है कि जिस स्थान पर नीलगिरी का पेड़ लगता है, वहां के आसपास के जमीन बंजर हो जाती है, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। नीलगिरी के नए किस्म के पौधे अब जमीन के अंदर का पानी नहीं सोखेंगे। इसके लिए वन विभाग द्वारा आईटीसी क्लोन (ITC Clone) विकसित किया। प्रदेश में ए-37 के-1485, जे-57 किस्म के पौधे पथरीले स्थान के साथ-साथ जहां पानी कम हो, वहां भी आसानी से बढ़ सकते हैं। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नीलगिरी के पौधों से किसान को लाखों रुपए कमाई के साथ-साथ कई तरह के फायदे मिल सकते हैं।
15 लाख पौधे कर रहे तैयार
वन विभाग की नर्सरी (Forest Department Nursery) में नीलगिरी के करीब 15 लाख उन्नत किस्म के पौधे तैयार किए जा रहे हैं। पूरे प्रदेश में 36 हजार एकड़ में हरियाली के लिए नीलगिरी यानी यूकेलिप्टस के पौधे रोपने की योजना वन विभाग ने बनाई है। विभाग के अनुसार एक पौधे की कीमत 10 रुपए और ट्रांसपोर्टिंग सहित 15 रुपए पड़ेगा।
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ये है तैयारी
नीलगिरी के 15 लाख पौधे तैयार किए गए थे, जिसमें से 12 से 13 लाख पौधों को मानसून सत्र में महासमुंद, जगदलपुर व मारवाही, कांकेर, बालोद सहित कई स्थानों में रोपे गए है। रायपुर, सरगुजा, बस्तर संभाग में 36 हजार एकड़ में पौधे रोपने की योजना है। ये पौधे किसानों की बंजर व अनुपयोगी भूमि में लगाए जाएंगे।
किसानों को ऐसा फायदा
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि नीलगिरी के लकड़ियों की बाजार में डिमांड बढ़ती जा रही है। इसका उपयोग कागज उद्योग, नौका निर्माण के साथ तेल और औषधि बनाने में होता है। इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी।
डीएफओ रायपुर विश्वेश झा ने बताया कि पहले प्रदेश में हाईब्रिड नीलगिरी के पौधे लगाए गए थे, जिसके कारण भू-जलस्तर गिरता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। इसकी कई प्रजातियां होती हैं, जल निकासी क्षमता वाली मिट्टी का चयन करना नीलगिरी के विकास के लिए आवश्यक है। विस्तृत रिसर्च के बाद ही योजना बनाई गई है।
Published on:
17 Dec 2022 07:20 am
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