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राष्ट्रीय मिर्गी दिवस: डीकेएस अस्पताल में होती है विशेष ओपीडी, ये लक्षण दिखते ही फौरन लें डॉक्टर की सलाह

DKS hospital: ब्रेन की सेल्स में अचानक और असामान्य रूप से केमिकल रिएक्शन होने के कारण इसका दौरा पड़ने लगता है। यदि समय रहते इसका इलाज कराया जाए तो इससे छुटकारा पाया जा सकता है।मिर्गी के मरीजों को देखते हुए डीकेएस सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में प्रत्येक शनिवार को विशेष ओपीडी लगाई जाती है।

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डीकेएस अस्पताल

DKS hospital: ब्रेन की सेल्स में अचानक और असामान्य रूप से केमिकल रिएक्शन होने के कारण इसका दौरा पड़ने लगता है, जिस वजह से व्यक्ति बेहोश भी हो सकता है। यदि समय रहते इसका इलाज कराया जाए तो इससे छुटकारा पाया जा सकता है। लगातार बढ़ रहे मिर्गी के मरीजों को देखते हुए डीकेएस सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में प्रत्येक शनिवार को विशेष ओपीडी लगाई जाती है, जहां 30 से 35 की संख्या में मरीज पहुंचते हैं। वहीं रोजाना की ओपीडी में इनकी संख्या 15 से 20 होती है। अस्पताल के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. अर्पित अग्रवाल बताते हैं, मरीजों में 70 से 80 फीसदी लोग ग्रामीण क्षेत्रों के होते हैं। इसमें ज्यादातर मरीज 5 से 20 साल के बीच होते हैं। इस बीमारी में एक ही टेबलेट दो साल तक सेवन करने से आराम हो जाता है।

जूता-मोजा सुंघाने से नहीं, दवा से ठीक होगी मिर्गी

विशेषज्ञों का कहना है, मिर्गी पर लोगों में भ्रांतियां फैली हुई है। मिर्गी कादौरा पड़ने पर जूता-मोजा सुंघाते हैं तो कई बार मिट्टी तेल पिला दिया जाता है। मरीज को निमोनिया हो जाता है। शहरी व ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के लोग मिर्गी को तंत्रमंत्र और जादू टोने से ठीक करने की कोशिश करते हैं। जागरूकता की कमीं के कारण बड़ी संख्या में लोग इलाज से वंचित रह जाते हैं। इसलिए लोगों को जागरूक करने हर साल 17 नवंबर को ‘नेशनल एपिलेप्सी डे’ मनाया जाता है।

डीकेएस अस्पताल के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. अग्रवाल बताते हैं, मिर्गी की बीमारी कई तरह की होती है। इसकी दो से तीन साल तक दवाई चलती है। 90 फीसदी मरीज एक ही दवाई से ठीक हो जाती हैं। बाकी के 10 फीसदी मरीजों को आगे की जांच की और दो-तीन दवाइयां लेने की जरूरत पड़ती है। कुछ मरीजों को सर्जरी की भी जरूरत पड़ती है। मिर्गी की दवाइयां नियमित लेनी पड़ती है। ऐसा नहीं करने पर पूरे शरीर में झटके आते हैं। सांस व हार्ट गति रूकने की संभावना रहती है। ऐसा नहीं करने पर 5 फीसदी मरीजों की मौत भी हो जाती है।

ये हैं लक्षण
मुंह से झाग निकलना, चक्कर आना, शरीर में जकड़न, बेहोशी जैसे लक्षण मिर्गी की ओर इशारा करते हैं। मिर्गी ब्रेन से जुड़ा एक क्रोनिक रोग है, जिसमें व्यक्ति को दौरे पड़ते हैं।

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संक्रामक बीमारी नहीं

मिर्गी संक्रामक नहीं है और मानसिक बीमारी या मानसिक कमज़ोरी के कारण नहीं होती है। कभी-कभी गंभीर दौरे के कारण मस्तिष्क को क्षति हो सकती है, लेकिन अधिकांश दौरे मस्तिष्क पर हानिकारक प्रभाव नहीं डालते हैं।

इस वजह से आते हैं मिर्गी के दौरे

जेनेटिक प्रभाव, सिर में चोट, मस्तिष्क की स्थिति, स्ट्रोक, जन्म के पूर्व की चोट, मस्तिष्क तक ऑक्सीजन की कमी, विकास संबंधी विकार आदि कारण हो सकते हैं।

बर्न यूनिट में कई मरीज भर्ती
मिर्गी के मरीजों में यह देखा गया कि अगर वह आग ताप रहे हैं या फिर खाना बना रहे हैं तो उन्हें इसी दौरान झटका आ जाता है। ऐसे में वह बुरी तरह से झुलस जाते हैं। डीकेएस हॉस्पिटल के प्लास्टिक सर्जरी वार्ड में बड़ी संख्या में ऐसे मरीजों का इलाज चल रहा है। इसके अलावा कई मरीजों की नदी-नालों में दौरा आने पर डूबने से मौत हो जाती है। ऐसे में मिर्गी के मरीजों को गाड़ी चलाने, पानी और आग के पास जाने, ऊंचाई पर जाने से मना किया जाता है।