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रायपुर में एक साथ तीन पीढिय़ों ने दूरदर्शन पर देखी रामायण

लॉकडाउन में दूरदर्शन ने शुरू किए पुराने एपिसोड

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रायपुर में एक साथ तीन पीढिय़ों ने दूरदर्श पर देखी रामायण

देवेंद्र नगर में मोदी फैमिली की तीन जनरेशन ने एक साथ रामायण देखी।

ताबीर हुसैन @ रायपुर। लॉकडाउन पर दूरदर्शन ने गुजरे जमाने के लोकप्रिय सीरियल्स शुरू किए हैं। इसमें रामायण और महाभारत को लेकर लोग काफी उत्साहित नजर आए। जिन लोगों ने टिनेजर्स टाइम में इसे देखा, वे उस दौर में खो गए। देवेंद्र नगर स्थित मोदी छाया में मोदी फैमिली की तीन जनरेशन ने एक साथ रामायण देखा। प्रवीणचंद्र मोदी ने कहा कि रामायण से जीने की सीख मिलती है। आज लॉकडाउन के बहाने ही सही पूरा परिवार इसे देख रहा है। डिजिटल दौर में ऐसे पौराणिक धारावाहिक की बहुत जरूरत थी। रामायण का पहला प्रसारण देखने वालों में सुरेखा, सरल, नेहा, गुंजन, प्राची, तरल, मेघा, युगांक, निक्षा, रमेश मोदी, प्रीति, आकश, निकिता, अनिकेत, अइतिका, क्षितिज, अमी, तिशिका,धैर्य, हेहन्या, आशीष और त्वेशा शामिल थे। बड़ों ने बच्चों संग उस वक्त की यादें साझा की।

प्रिंसिपल रूम में देखते थे

मैं फस्र्ट ईयर में थी। हम हॉस्टल में थे। वहां एक ही टीवी था प्रिंसिपल के रूम में। इसे हर संडे रामायण शुरू होने के 5 मिनट पहले ओपन कर दिया जाता था। हम सभी तैयार होकर आगे बैठने के चक्कर में समय से पहले ही पहुंच जाते थे। वह दौर बेहद खूबसूरत होता था। वह पहला सीरियल था तो पुराणों पर आधारित था। किरदार से लेेकर संवाद और डे्रस हर चीज यूनिक थी।

प्रवीणा त्रिपाठी, भावना नगर

रास्ते में देखते थे महाभारत

डांस सीखने के लिए मैं हर संडे पापा के साथ स्कूटर पर राजनांदगांव से खैरागढ़ जाया करती थी। जब महाभारत शुरू होता था तो हमने रास्ते के एक गांव को स्टॉपेज बनाया था। वहां एक घर में टीवी थी। सीरियल शुरू होते ही हम वहां पहुंच जाते थे। एक घंटे रुककर महाभारत देखते थे फिर खैरागढ़ के लिए रवाना होते थे। डांस सीेखने के लिए हर हफ्ते राजनांदगांव जाना और बीच में रुककर महाभारत देखना मेरी स्ट्रांग मेमोरी में समाया है।

स्वप्निल कर्महे, अश्वनी नगर

दुकान के बाहर खड़े होकर देखते थे

मैं 8वीं में था। उस समय टीवी घरों में होता था। हम सारा काम सुबह 9 बजे के पहले खत्म करके इस फिराक में रहते थे कि किसी तरह पड़ोस में जगह मिल जाए नहीं तो किसी इलेक्ट्रॉनिक या कुछ बड़े दुकान के सामने खड़े होकर देखते थे। फिर एक दिन कलर टीवी में देखने का मौका मिला तब लगा इसका असली मजा इसी में है। ये धारावाहिक भारत के सभी रामायण सबंधित किताबों का निचोड़ था। अत: कुछ एक जगह जनसामान्य के समझ से परे होता था। उसके स्पष्टीकरण के लिए कड़ी के अंत मे रामानंद सागर खुद आते थे। गांव में सुनते थे कि लोग दिया अगरबत्ती वगैरह लेकर बड़ी श्रद्धा के साथ इसे देखते थे। मुझे खुद भी ये सीरियल और इसका गीत संगीत बहुत पसंद था खासकर हनुमानजी का चरित्र और रामजी की सेना चली वाला गाना।

सतीश पांडे, शुक्रवारी बाजार गुढिय़ारी

सौभाग्य है मेरा
समता कॉलोनी निवासी सची साहू, कर्णिका साहू, मेहर साहू ने रामायण देखी। सची ने बताया कि आज मेरा बचपन याद आ गया। मैं अपने बच्चों संग फिर से देख रही हूं। ये मेरा सौभाग्य है।

हर दौर के बच्चे देखें
तिवारी परिवार ने रामायण देखते हुए अपने संस्मरण साझा किए। यहां के मुखिया ने कहा- टीवी के इतिहास में रामायण कालजयी धारावाहिक रहा है। इसे हर दौर के बच्चों को देखना चाहिए।

गौरवान्वित महसूस कर रहा
मोवा निवासी ललित साहू ने बताया, जब हमने सुना कि रामायण और महभारत का रिपीट टेलीकॉस्ट होना है तो खुशी का ठिकाना न रहा। आज मैं परिवार के साथ इसे देखकर गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं।

लाइफ लाइन थी रामायण
बिरगांव के मनीष साहू कहते हैं, रामायण से मेरा हमेशा का नाता जुड़ा है। जितना रोमांच इसे देखने में आया वह कभी किसी सीरियल में नहीं आया। रामायण हमारी लाइफ लाइन हुआ करती थी।

संस्कार आएंगे
ऋतुराज कहते हैं कि रामायण से बहुत कुछ सबक मिलता है। खासतौर पर इसे बाल्यावस्था में देखना चाहिए जैसा कि हमने देखा। आज के बच्चे अगर इसे निरंतर देखते हैं तो उनमें संस्कार आएंगे।

दूरदर्शन की अच्छी पहल
मोहित श्रीवास्तव ने कहा कि पुराने सीरियल खासतौर पर महाभारत और रामायण का पुन: प्रसारण बहुत अच्छी पहल है। हमने परविार समेत इसे देखा। लॉकडाउन भी यादगार बन गया।

जीवन के कई सवाल छिपे हैं
गोपाल पटेल कहते हैं, हमारी बिटिया परी को रामायण की चौपाइयां याद है। वह रामायण देखकर काफी उत्साहित है। दरअसल रामायण में जीवन के कई सवाल छिपे हैं, जिसकी जरूरत हर किसी को एक न एक दिन पड़ती है।