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नवा रायपुर में घर बनाने की टाइम लिमिट 5 साल से कम होगी

1000 वर्गफीट प्लॉट का फैसला प्रबंधन ने ठुकराया, एनआरडीए ने कहा- बसाहट के लिए सभी प्रयोग इधर मध्यम वर्गीय परिवारों को नहीं मिल रहा नवा रायपुर में रहने का मौका

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नवा रायपुर में घर बनाने की टाइम लिमिट 5 साल से कम होगी

नवा रायपुर में घर बनाने की टाइम लिमिट 5 साल से कम होगी

रायपुर. नवा रायपुर में बसने के लिए मध्यम वर्गीय परिवारों का सपना एक बार फिर टूटा है। बसाहट बढ़ाने के लिए प्रबंधन ने सस्ते और छोटे प्लॉट का विकल्प देने के बजाय दूसरी योजना पर काम करना शुरू कर दिया है, जिसमें ५ साल के भीतर घर नहीं बनाने वालों की जमीन निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी।
इस टाइम लिमिट को और कम करने का निर्णय अगले महीने लिया जा सकता है, ताकि नवा रायपुर सिर्फ इनवेस्टमेंट की जगह नहीं बने। वर्तमान में ५ साल के भीतर घर नहीं बनाने पर पेनाल्टी लगाने और आवंटन रद्द करने का नियम है। प्राधिकरण का मानना है कि ५ साल की समय-सीमा को और कम करने के फैसले से मकान निर्माण में तेजी जाएगी। इसे संभवत: इसे ३ या ४ साल किया जा सकता है। इधर प्रबंधन ने अलग-अलग सेक्टरों में १००० वर्गफीट में छोटे प्लॉट के विकल्प का प्रस्ताव ठुकरा दिया है। नवा रायपुर में लंबे समय से छोटे प्लॉट की मांग हो रही है, जिसमें मध्यम वर्गीय परिवारों का घर का सपना पूरा हो सके, लेकिन प्रबंधन ने यहां १२०० वर्गफीट से प्लाटिंग की शुरुआत की है, कई सेक्टरों में यह विकल्प भी नहीं है, वहीं कीमतें भी १४०० रुपए प्रति वर्गफीट से अधिक है। इस पूरे मामले में नवा रायपुर विकास प्राधिकरण का कहना है कि नवा रायपुर में बसाहट बढ़ाने के दूसरे ढ़ंग से प्रयास शुरू कर दिया गया है। इसका असर आने वाले समय में दिखाई देगा।
ज्यादातर निवेशक, इसलिए नहीं बने घर
नवा रायपुर में ज्यादातर सेक्टरों में निजी मकानों का निर्माण ५ फीसदी भी नहीं है। सूत्रों के मुताबिक ज्यादातर निवेशकों ने यहां जमीन की खरीदी है। इसलिए मकान बनने की रफ्तार में तेजी दिखाई नहीं दे रही है। बसाहट को लेकर प्रबंधन ने तमाम अनुप्रयोग किए, लेकिन इसका बड़ा फायदा नहीं मिला। स्वास्थ्य, शिक्षा और मनोरंजन की सुविधाओं में भी इजाफा नहीं किया जा सका है।
प्रस्ताव आने के बाद भी अमल नहीं
बीते महीने हुई बोर्ड की बैठक में अलग-अलग सेक्टरों में छोटे प्लॉट का विकल्प प्रस्तुत करने का प्रस्ताव आया था, लेकिन एनआरडीए प्रबंधन ने इसे ठुकरा दिया, जबकि राज्य सरकार की अन्य एजेंसी जैसे आरडीए की बात करें तो कमल विहार में १००० वर्गफीट से छोटे जैसे ७०० और ८००, १००० वर्गफीट के प्लॉट आवासीय प्रायोजन के लिए आरक्षित रखा गया है।
नवा रायपुर विकास प्राधिकरण के सीईओ नीलम एक्का ने बताया कि नवा रायपुर में घर बनाने के लिए दी गई मोहलत ५ साल हैं, जो कि और कम की जाएगी। बसाहट के लिए कोशिशें की जा रही है। फिलहाल १००० वर्गफीट के प्लॉट का विकल्प नहीं है। आर्थिक रूप से कमजोर तबकों के लिए पीएम आवास योजना का विकल्प है।