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पत्रिका मोटिवेशनल स्टोरी: ट्रक ड्राइवर का बेटा बना कनाडा रेलवे का सरकारी कर्मचारी

प्रतिभा: जगदलपुर शहर के रविंदर सिंह ने छोटी सी उम्र में संघर्षों से पाया बड़ा मुकाम- मध्यमवर्गीय परिवार से निकलकर साबित की खुद की प्रतिभा

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रायपुर/जगदलपुर. शहर के 24 वर्षीय रविंदर सिंह ने छोटी सी उम्र में मुश्किल हालात का सामना करते हुए आज जो मुकाम हासिल किया वहां तक पहुंचना आसान नहीं है। रविंदर ने पांच साल पहले अपने सपने साथ लेकर कनाडा की उड़ान भरी। रविंदर के पास उस वक्त कनाडा में कोई सपोर्ट नहीं था उन्होंने जो कुछ किया अपने बुते किया और आज वे कनाडा रेलवे में बतौर टेक्निकल स्टाफ कार्यरत हैं। अब उन्हें कनाडा की नागरिकता भी मिल चुकी है।

रविंदर इन दिनों जगदलपुर में छुट्टियों पर आए हुए हैं और यहां पत्रिका से बातचीत करते हुए बताया कि उनके घर में पिता हरभजन सिंह पेशे से ट्रक ड्राइवर हैं और मां नरिंदर कौर शहर के एक कपड़े की दुकान में बतौर कैशियर काम करती हैं। रविंदर बताते हैं 12वीं तक की पढ़ाई उन्होंने जगदलपुर शहर के विद्या ज्योति स्कूल से पूरी की। इसके बाद मैकेनिकल में उन्होंने एक साल का आईटीआई का कोर्स भी किया। इस बीच उन्होंने कनाडा की यूनिवर्सिटी कैप ब्रैटेन का एंट्रेंस एग्जाम देने कनाडा और उनका चयन भी हो गया। साल 2019 में रविंदर को डिग्री मिली। इसके बाद उनकी पहली जॉब अमेजन में लगी। यहां आठ महीने काम किया। इसी दौरान कनाडा रेलवे की वैकेंसी की जानकारी मिली और फिर इसकी तैयारी में जुट गए। कुछ दिनों बाद जब वहां के लिए एग्जाम हुआ तो उसमें भी सफलता मिल गई।

मौसम एक बड़ी चुनौती
रविंदर बताते हैं कि जब पहली बार वे कैनेडा पहुंचे तो वहां बहुत सी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। सबसे बड़ी चुनौती मौसम की थी। जिस शहर में रहकर वे पढ़ाई कर रहे थे उसका नाम नोवा स्कोटियो था और वहां का ट्रेम्प्रेचर ज्यादातर माइनस में ही होता है।

कनाडा पहुंचना नहीं था आसान
रविंदर बताते हैं उनके परिवार में आय के स्रोत बेहद सीमित हैं। ऐसे में विदेश जाकर पढ़ाई करना किसी सपने की तरह ही था लेकिन परिवार में माता-पिता ने किसी तरह पैसे जोड़कर पहली बार भेजा। ऐसा इसलिए संभव हो पाया क्योंकि जिस यूनिवर्सिटी में रविंदर का दाखिला हुआ वहां उनके अच्छे अंक को देखते हुए यूनिवर्सिटी ने स्कॉलरशिप दी जिससे पढ़ाई का खर्च निकल गया।