ताबीर हुसैन @ रायपुर. यूएस का बच्चा-बच्चा अपने कानून को लेकर अवेयर है, जबकि हमारे यहां ऐसा नहीं है। बात चाहे धारा 377 हटने की हो, अबॉर्शन लॉ हो या महिलाओं के लिए बनाए गए विशेष कानून। इन्फेक्ट टैक्स में भी महिलाओं को छूट दी गई है। इस लिहाज से यहां का कानून बहुत अच्छा है। हमारे देश में होने वाले बदलाव में ज्यूडिशियरी की अहम भूमिका है। यह कहना है सिटी की सृष्टि शर्मा का । वे यूएस की लीगल कंपनी ई-डिस्कवरी में काम कर रही हैं। कंपनी का सूरत में भी दफ्तर है लेकिन सृष्टि वर्क फ्रॉम होम कर रही हैं। यह कंपनी अमरीकियों को लीगल सर्विस प्रोवाइड कराती है।
टेक्नोलॉजी को एडॉप्ट करने की जरूरत
मेरा लक्ष्य आर्टिफिशली इंटेलिजेंस में पीएचडी करूं। एआई और आईटी ही फ्यूचर है। लीगल फील्ड में भी इसकी जरूरत है। हमें टेक्नोलॉजी को एडॉप्ट करने की जरूरत है। इसके लिए हमें ऐसे प्रोफेशनल्स की जरूरत है जो हमारे देश में इसे ला सकें। मैं चाहती हूं कि मुझे ऐसे रिसोर्सेस मिले ताकि मैं अच्छे से स्टडी कर पाऊं। ताकि मैं अपनो बेस्ट कॉन्ट्रीब्यूशन दे सकूं। मैंने अपने देश का बार एग्जाम दिया है। न्यूयार्क बार एग्जाम देने के बाद वहां पैरवी भी कर सकती हूं।
पढ़ाई का पैटर्न
यूएस और हमारे यहां पढ़ाई का सिस्टम बिल्कुल अलग है। हमारे यहां क्लास में प्रोफेसर या टीचर पढ़ाते हैं जबकि वहां हमें चेप्टर पढक़र बैठना होता है। हमारे यहां हर चीज सिखाई जाती है जबकि वहां खुद से करनी होती है। यहां तो हमारे पर्सनल काम भी घर वाले कर देते हैं लेकिन खुद करना होता है। पढ़ाई के दौरान मैंने यूएस पुलिस के साथ पार्ट टाइम काम किया था।