
Vision Document 2030 of School Education: रायपुर. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रविवार को राजधानी पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में दो दिवसीय जवाहर लाल नेहरु राष्ट्रीय शिक्षा समागम का उद्घाटन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने स्कूली शिक्षा का विजन डाक्यूमेंट 2030 के तहत तीन महत्वपूर्ण घोषणाएं की। उन्होंने कहा, स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम विद्यालय की तर्ज पर गुणवत्तायुक्त शिक्षा के लिए प्रदेश में अंतरराष्ट्रीय मानकों के स्कूल शुरू किए जाएंगे। 3 वर्ष से अधिक आयु के बच्चों के लिए बालवाड़ी खुलेगी। इसमें उन्हें पूर्व प्राथमिक शिक्षा दी जाएगी। नौवीं से 12वीं के विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुखी शिक्षा प्रदान की जाएगी, ताकि बच्चे अपनी पढ़ाई के साथ-साथ किसी विधा विशेष में हुनर अर्जित कर सकें। बता दें इस वर्ष हायर सेकंडरी की शिक्षा के साथ कुछ स्कूलों में चुनिंदा ट्रेडों में आईटीआई के प्रशिक्षण की शुरुआत कर दी गई है। कार्यक्रम की अध्यक्षता स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ.प्रेमसाय सिंह टेकाम ने की। इस दौरान संसदीय सचिव द्वारिकाधीश यादव, महापौर एजाज ढेबर, पापुनि के अध्यक्ष शैलेष नितिन त्रिवेदी, राज्य खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष राजेंद्र तिवारी, स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ.आलोक शुक्ला सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद थे।
आधुनिक भारत में नेहरू का योगदान
मुख्यमंत्री ने कहा, आधुनिक भारत के निर्माण में पंडित जवाहरलाल नेहरूके योगदान को जब भी याद किया जाएगा, तब नेहरू जी द्वारा विशेष रूप से आर्थिक और शैक्षणिक क्षेत्र में की गई शुरूआत, निर्मित की गई महत्वपूर्ण अधोसंरचनाओं को हमेशा याद किया जाएगा।
कमी और बेहतरी पर होगी चर्चा
मुख्यमंत्री ने कहा, इस दो दिवसीय शिक्षा समागम के दौरान पिछले 75वर्षों में बच्चों की शिक्षा के क्षेत्र में क्या कार्य किए गए और उनमें क्या कमी रह गई। बच्चों की शिक्षा के लिए और बेहतर क्या किया जा सकता है, हम किस दिशा में आगे बढ़े, इस पर विचार-विमर्श किया जाएगा। इस समागम में 27 राज्यों से आए प्रतिनिधियों से छत्तीसगढ़ को भी काफी कुछ सीखने का अवसर मिलेगा।
आईएएस के बच्चों ने लिया प्रवेश
मुख्यमंत्री ने कहा, गरीब बच्चों को भी अंग्रेजी माध्यम में गुणवत्तापूर्ण नि:शुल्क शिक्षा प्रदान करने के लिए राज्य सरकार द्वारा प्रारंभ किए गए स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल राज्य सरकार की सबसे लोकप्रिय योजनाओं में है। इन स्कूलों में अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों के बच्चों ने भी प्रवेश लिया है। इन स्कूलों में 25 प्रतिशत स्थान गरीब परिवारों के बच्चों के लिए रखे गए हैं। अनुसूचित क्षेत्र के अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में 90 प्रतिशत बच्चे गरीब परिवारों के हैं। इन स्कूलों में मजदूर परिवारों के बच्चे भी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
Published on:
15 Nov 2021 03:26 pm
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