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जानिए क्या है सिंधू नदी समझौता? रद्द होने पर किसे होगा नफा – नुकसान 

उरी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया है. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं क्या पाक को सबक सिखाने के लिए भारत 56 साल पुराने सिंधू नदी समझौते को रद्द कर देगा.

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Abhishek Jain

Sep 24, 2016

What is Sindhu River agreement?

What is Sindhu River agreement?

रायपुर. कश्मीर में पाकिस्तानी आतंकवादियों के द्वारा किए गए उरी हमले में 18 जवानों के शहीद होने के बाद दोनों देशों में शीत यु्द्घ जारी है। हमले के बाद रिस्तों में आई कड़वड़ाहट के कारण दोनों ही एकदूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। ऐसे में सवाल ये उठ रहा है कि भारत पाकिस्तान को करारा जवाब देने के लिए क्या 1960 में किए सिंधू नदी समझौते को रद्द कर देगा। यदि ऐसा हुआ तो पाकिस्तान में अकाल की स्थिति पैदा हो जाएगी। क्योंकि सिंधू नदी पाकिस्तान के लिए जीवन दायिनी है।

तीन युद्धों के बाद भी टिका है समझौता
अभी तक दोनों देशों के बीच तीन युद्धों के बावजूद यह संधि बनी रही है. हालांकि, गुरुवार को भारत ने इस मुद्दे को उठाया, कहा कि कोई भी संधि दोनों पक्षों के बीच चआपसी सहयोग और विश्वास पर ही टिकी होती है. लेकिन, यह किसी वास्तविक खतरे की तुलना में दबाव बनाने की रणनीति ज्यादा प्रतीत होती है. ऐसा भारत पहले भी कह चुका है. अगर भारत इसे रद्द करेगा तो दुनिया के शक्तिशाली देश इसकी आलोचना करेंगे क्योंकि यह समझौते कई मुश्किल हालात में भी टिका रहा है।

ऐसे समझें सिन्धु नदी समझौते को
  • विश्व बैंक की मध्यस्थता में भारत और पाकिस्तान के बीच यह समझौता हुआ था. समझौते के तहत उत्तर भारत की छह नदियों का नियंत्रण दोनों देशों के बीच बांट दिया गया.
  • भारत को जहां ब्यास, रावी और सतलज के पानी पर नियंत्रण का मौका मिला वहीं पाकिस्तान को सिंधु, चेनाब और झेलम के पानी का नियंत्रण मिला.
  • समझौते के अंतर्गत सिंधु नदी की सहायक नदियों को पूर्वी और पश्चिमी नदियों में विभाजित किया गया. सतलज, ब्यास और रावी नदियों को पूर्वी नदी बताया गया जबकि झेलम, चेनाब और सिंधु को पश्चिमी नदी बताया गया.
  • -समझौते के मुताबिक पूर्वी नदियों का पानी, कुछ अपवादों को छोड़े दें, तो भारत बिना रोकटोक के इस्तेमाल कर सकता है. पश्चिमी नदियों का पानी पाकिस्तान के लिए होगा लेकिन समझौते के भीतर कुछ इन नदियों के पानी का कुछ सीमित इस्तेमाल का अधिकार भारत को दिया गया, जैसे बिजली बनाना, कृषि के लिए सीमित पानी. अनुबंध में बैठक, साइट इंस्पेक्शन आदि का प्रावधान है.
  • -समझौते के अंतर्गत एक स्थायी सिंधु आयोग की स्थापना की गई. इसमें दोनो देशों के कमिश्नरों के मिलने का प्रस्ताव था. ये कमिश्नर हर कुछ वक्त में एक दूसरे से मिलेंगे और किसी भी परेशानी पर बात करेंगे.
  • - अगर कोई देश किसी प्रोजेक्ट पर काम करता है और दूसरे देश को उसकी डिज़ाइन पर आपत्ति है तो दूसरा देश उसका जवाब देगा, दोनो पक्षों की बैठकें होंगी. अगर आयोग समस्या का हल नहीं ढूंढ़ पाती हैं तो सरकारें उसे सुलझाने की कोशिश करेंगी.
  • इसके अलावा समझौते में विवादों का हल ढूंढने के लिए तटस्थ विशेषज्ञ की मदद लेने या कोर्ट ऑफ़ आर्ब्रिट्रेशन में जाने का भी रास्ता सुझाया गया है.
क्यूँ मुश्किल है इस समझौते को रद्द करना
उरी हमले के बाद पाकिस्तान पर दबाव बनाने के लिए भारत 1960 में हुई इस संधि को रद्द कर सकता है? सैद्धांतिक तौर पर भारत को इस समझौते से खुद का दूर करने का अधिकार है लेकिन इसे लागू करने की व्यावहारिक दिक्कतों को देखते हुए कहा जा सकता है कि इस समझौते को रद्द करना न केवल मुश्किल है बल्कि भारत को इसका कोई फायदा नहीं होगा.

  • सिंधु नदी की घाटी में आधा पाकिस्तान बसा हुआ है. भारत अगर अचानक से पाकिस्तान को जाने वाले पानी को रोकता है तो जम्मू-कश्मीर और पंजाब राज्य बाढ़ में डूब जाएगा.
  • वहीं पाकिस्तान में उसके नियंत्रण वाली तीनों नदियों को भी आपस में नहीं जोड़ा जा सकता क्योंकि इनके बीच पीर पंजाल पहाड़ी पड़ती है.
  • दूसरा संधि के मुताबिक भारत अपनी नियंत्रण वाली नदियों के पानी का कुल २० फीसदी ही पानी रोक सकता है. भारत को बांध बनाने की अनुमति होगी लेकिन वह बहाव को रोकने वाला नहीं होगा.
  • भारत को इन नदियों का पानी रोकने के लिए कई बांध और नहरें बनानी होंगी जिसके लिए बहुत पैसे और वक्त की जरूरत होगी. इससे विस्थापन की समस्या भी सामने आएगी. साथ ही पर्यावरण को होने वाला नुकसान कहीं बड़ा होगा.
  • पाकिस्तान के लिए सिंधु नदी समझौता उसकी जीवन रेखा है. पाकिस्तान की अर्थव्यस्था इस समझौते पर टिकी है. सिंचाई से लेकर बिजली उत्पादन तक. ऐसे में अगर भारत इस समझौते को तोड़ता है तो इससे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि को नुकसान होगा.
  • साथ ही अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान इसे मानवाधिकार का मामला बताते हुए भारत को घेरने की कोशिश करेगा. जबकि अभी तक इस मामले में भारत बढ़त की स्थिति में रहा है और समझौता टूटने की स्थिति में वह इसे गंवा सकता है.

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