अभी तक दोनों देशों के बीच तीन युद्धों के बावजूद यह संधि बनी रही है. हालांकि, गुरुवार को भारत ने इस मुद्दे को उठाया, कहा कि कोई भी संधि दोनों पक्षों के बीच चआपसी सहयोग और विश्वास पर ही टिकी होती है. लेकिन, यह किसी वास्तविक खतरे की तुलना में दबाव बनाने की रणनीति ज्यादा प्रतीत होती है. ऐसा भारत पहले भी कह चुका है. अगर भारत इसे रद्द करेगा तो दुनिया के शक्तिशाली देश इसकी आलोचना करेंगे क्योंकि यह समझौते कई मुश्किल हालात में भी टिका रहा है।