
पिछले साल भी 1400 से ज्यादा छोटी-बड़ी चोरियां हुई थीं
रायपुर
समय के साथ चोरों ने खुद को अपडेट कर लिया है, लेकिन पब्लिक उनसे काफी पीछे है। पुलिस की जांच का पैटर्न ऐसा है कि चोरों ने इसका भी तोड़ निकाल लिया है। इससे चोरी के मामले तो बढ़ रहे हैं, लेकिन उनकी गिरफ्तारी के आंकड़े कम है। दरअसल पेशेवर चोर जहां कैमरे नहीं या बहुत कम हैं, वहीं वारदात को अंजाम दे रहे हैं। और चोरी करते समय मोबाइल(Mobile) का इस्तेमाल करना भी बंद कर दिया है। यही वजह कि वे आसानी से पकड़े नहीं जाते। इन्हें पकड़ने पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ती। सीसीटीवी कैमरा(CCTV) और अन्य सुरक्षा उपायों को लेकर लोगों में जागरूकता की कमी भी चोरों को बढ़ावा दे रही है। पिछले साल भी 1400 से ज्यादा छोटी-बड़ी चोरियां हुई थीं। इनमें से आधे से ज्यादा के आरोपी पकड़े नहीं गए हैं। इस साल भी फरवरी-मार्च में 10 से ज्यादा बड़ी चोरियां हो चुकी हैं। उनके आरोपी भी पकड़ में नहीं आए हैं।
रायपुर पहुंचते ही बंद कर देते हैं मोबाइल
पेशेवर चोर गिरोह पुलिस की स्ट्रेटजी को जानते हैं। इसलिए कई गिरोह रायपुर पहुंचते ही अपना मोबाइल बंद कर देते हैं। मध्यप्रदेश(Madhyapradesh) के धार का पत्थर गिरोह रेलवे स्टेशन पहुंचने से पहले अपने मोबाइल बंद कर देते हैं। चोरी करने के बाद वापस ट्रेन में लौटने पर चालू करते हैं। यही तरीका झारखंड(Jharkhand) के साहिबगंज(Sahibganj) का चोर गिरोह भी अपनाता है। चोरी करके रायपुर(Raipur) छोड़ने के बाद ही मोबाइल ऑन करते हैं। बांग्लादेशी चोर गिरोह भी इसी पैटर्न में वारदात करते हैं। इसके अलावा राजस्थान(Rajsthan), ओडिशा(Odisha) के गिरोह भी सक्रिय हैं।
यहां की वारदातें
-टिकरापारा के सांईवाटिका में सरकारी सप्लायर के घर लाखों की डकैती। घर में कैमरे नहीं लगे थे। आसपास भी नहीं थे।
-विधानसभा के रहेजा रेसीडेंशियल कॉलाेनी में ठेकेदार के घर 10 लाख की चोरी। घर में कैमरा लगा था, लेकिन आसपास व मेनरोड में नहीं था।
-विधानसभा के सकरी में 10 लाख की चोरी। घर और आसपास कैमरा नहीं था।
प्रमुख मार्गों व संस्थानों में लगे सीसीटीवी में ये हैं खामियां
-अधिकांश व्यापारिक संस्थानों ने सीसीटीवी कैमरों का फोकस अपने काउंटर और गेट में कर रखा है, मेन रोड की ओर नहीं।
-प्रमुख मार्गों में लगे आईटीएमएस के कई कैमरे खराब हैं। उनका मेंटनेंस नहीं हो पा रहा है।
-घरों में लगे अधिकांश कैमरों का नाइट विजन, स्टोरेज क्षमता जरूरत के मुताबिक नहीं रहती है।
-मिशन सिक्योरसिटी के तहत एक समय तीन श्रेणियों में पुलिस 8 हजार कैमरे लगवा चुकी थी शहर में, मेंटेनेंस के अभाव में आधे से ज्यादा बंद हो गए।-चोरी से बचने कई इलेक्ट्रानिक डिवाइस भी बाजार में हैं। सक्षम लोग इसका इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं।
यह लापरवाही पड़ रही भारी
-बाहर से आने वाले अंजान लोगों को पैसों के लालच में कई लोग बिना जानकारी के मकान किराए पर दे देते हैं।
-किराएदारों का पुलिस वेरीफिकेशन नहीं कराते हैं।
-पुलिस सीसीटीवी कैमरों और तकनीकी जांच पर ज्यादा निर्भर हो गई है।
-मुसाफिरी जांच में ढिलाई बरतना। मुखबिर तंत्र भी कमजोर होना।
पेशेवर चोर करते हैं प्लानिंग
पुलिस को ऐसे चोरों को पकड़ने में ज्यादा दिक्कत होती है, जो पेशेवर होते हैं। ये चोर गिरोह प्लानिंग के साथ आते हैं। एक-दो दिन शहर में घूमकर उन इलाकों को चयन करते हैं, जहां सीसीटीवी कैमर न या बहुत ही कम हो। और वहां से निकलना आसान हो। इसके बाद वारदात को अंजाम देते हैं।
बढ़ रहे हैं मामले
वर्ष 2020 में जिले में 1138 चोरिंयां हुई थीं, जो 2021 में बढ़कर 1462 हो गई। वर्ष 2022 में जनवरी से मार्च तक 150 से ज्यादा छोटी-बड़ी चोरियां हो चुकी हैं।
वर्सन
चोरी करने वाले प्लानिंग के साथ वारदात करते हैं। वर्तमान में सीसीटीवी कैमरा अपराधियों को पकड़ने में बहुत उपयोगी है। इसलिए पेशेवर चोर गिरोह ऐसे स्थान का चयन करते हैं, जहां सीसीटीवी का अभाव हो। शहर में हुई चोरी के आरोपियों की तलाश की जा रही है।
-गिरीश तिवारी, टीआई, एसीसीयू, रायपुर
Published on:
07 May 2022 06:02 pm
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