रायपुर. गोदना हमारी छत्तीसगढ़ी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रहा है। बैगा समेत कई जनजातियां और रामनामी समाज ने गोदना कला को जिंदा रखा है। इसी का मॉर्डन अवतार है टैटू। यंगस्टर्स में इसकी पॉपुलर्टी देखते ही बनती है। आनंद समाज लाइब्रेरी में युवा पीढ़ी को टैटू आर्ट की बारीकियां सिखाई जा रही हैं। मुंबई से आए शैलेंद्र श्रीवास्तव (शैली) मास्टर ट्रेनर हैं।