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अद्भुत है मां कंकाली का रहस्य

नवरात्रि में एक दिन कुछ पल के लिए सीधी होती है टेढ़ी गर्दन।

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अद्भुत है मां कंकाली का रहस्य

अद्भुत है मां कंकाली का रहस्य

रायसेन. पहाडिय़ों, कंदराओं में कई जगह विराजी मां अंबे की महिमा हर जगह अलग-अलग सुनाई देती है। हर जगह की महिमा निराली है। कई चमत्कार सुनने को मिलते हैं, लेकिन सबका सार यही है कि मां हर व्यक्ति की अरदास पूरी करती हैं। रायसेन जिले के गुदावल गांव में विराजी मां कंकाली की महिला निराली है। यह संभवत: देश की एक मात्र मां की प्रतिमा है, जिसकी गर्दन एक ओर लगभग 30 डिग्री झुकी हुई है। कहा जाता है कि नवरात्रि में एक दिन कुछ पल के लिए प्रतिमा की गर्दन सीधी होती है। यही रहस्य श्रद्धालुओं को इस मंदिर तक खींच लाता है। नवरात्रि में यहां दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं।
इस मंदिर की स्थापना 1731 के आस-पास मानी जाती है। ऐसी मान्यता है कि इसी वर्ष खुदाई के दौरान यह मंदिर मिला था। हालांकि मंदिर कब अस्तित्व में आया इसकी तारीख या वर्ष का कोई सटीक प्रमाण नहीं मिलता है। कहा जाता है कि यहां के निवासी हरलाल को सपना आया था, जिसके अनुसार उसने जमीन की खुदाई की तो वहां देवी की प्रतिमा निकली।
मंदिर को लेकर यह मान्यता है कि जो भी भक्त यहां बंधन बांधकर मनोकामना मांगता है, उसकी मुराद जरूर पूरी होती है। दूर-दूर से भक्त यहां अपनी मुरादें लेकर आते हैं। मन्नत पूरी होने के बाद बांधा गया बंधन खोल जाते हैं। हैं। नवरात्र के अवसर पर मां भवानी के दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ पहले दिन से लगती है।
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