
Bali son Angad learns the Lankeshwar Raisen In the Shriram Leela Festival, effective Leela was staged on the dialogue between Bali son Angad and Lankapati Ravan on Tuesday. New Delhi: In 2019, a huge crowd of people came to see the Ramlila Mela on Tuesday. People also enjoyed the attractive swing with the family.
रायसेन. श्रीराम लीला महोत्सव में मंगलवार को बालि पुत्र अंगद और लंकापति रावण के बीच संवाद की प्रभावी लीला का मंचन किया गया। नए साल 2019 में मंगलवार को रामलीला मेला देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। लोगों ने परिवार सहित आकर्षक झूलों का आनंद भी उठाया। श्रीराम लीला मेला संचालन समिति के प्रमुख पं. राजेंंद्र प्रसाद शुक्ला, मुन्नालाल शर्मा, प्रदीप शर्मा, प्रवक्ता सीएल गौर ने बताया कि मंगलवार को बालि पुत्र अंगद और लंकापति दशानन के संवाद की प्रभावी लीला का मंचन हुआ।
बुधवार को लक्ष्मण शक्ति की लीला का प्रसंग होगा। उन्होंने बताया कि श्रीराम बालि पुत्र अंगद को लंका में रामदूत बनाकर भेजते हैं। प्रभु श्रीराम कहते हैं कि यदि लंका का राजा दशानन बात मान जाए तो ठीक है अन्यथा लंका विजय के लिए महासंग्राम करने की रणनीति तैयार की जाएगी।
वहीं लंका दबरार में अंगद ने लंकेश्वर से कहा कि यदि आप श्रीराम लखनलाल से संधि कर लें तो उचित रहेगा।
माता जानका को पूरे सम्मान के साथ पंचवटी रामादल वापस भिजवा दें। इसी में आपकी असुर जाति की भलाई होगी। मगर लंकेश्वर अंगद की कोई बात नहीं मानता, वह अपने अहम में चूर रहता है। रामदल में क्या एक से बढ़कर एक वानर और भालुओं की सेना है। तब अंगद लंकेश्वर को ललकारते हुए कहते हैं कि अब प्रभुराम के प्रति कर्तव्य भक्ति ही और उनका काज पूरा करना ही हमारा धर्म बन गया है।
'हनुमान ने श्रीराम की सेवा कर मिसाल कायम की है
सिलवानी. 'मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवन में आत्मसात करने का प्रत्येक जीव को प्रयास करना चाहिए। आदर्शों को अपनाए बगैर जीवन को सुखी व समृद्ध नहीं बनाया जा सकता है। मात्र मानस सम्मेलन में भगवान श्रीराम के प्रसंग सुनना सार्थक नहीं होगा, जब तक कि सुने गए उनके आदर्शों का अनुसरण नहीं किया जाए। सुनना व अनुसरण करना जीवन के दो अलग-अलग पहलू होते हंै।
यह उद्गार आचार्य डॉ. रामाधार उपाध्याय विद्यावाचस्पति ने व्यक्त किए। वह मंगल गार्डन में चल रहे श्रीराम चरित मानस सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। डॉ. उपाध्याय ने बताया कि प्रत्येक व्यक्ति को भगवान श्रीराम से यह अपेक्षा रखनी चाहिए कि जिस प्रकार द्रोपदी, शबरी, केवट आदि को भवसागर से पार लगाया है। उसी तरह प्रत्येक जीव को भवसागर से पार लगा कर सभी का उद्धार करें।
आवश्यकता इस बात की है कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्शों को आत्मसात करें, तभी जीवन में सात्विकता का भाव आ सकता है।
उन्होंने कहा कि प्राणियों को श्रीराम भक्त हनुमान के द्वारा स्वामी भगवान श्रीराम व माता सीता की निस्वार्थ भाव से सेवा करने के भाव को जीवन का हिस्सा बना कर भगवान की आराधना करना चाहिए। हनुमान ने श्रद्धा के साथ श्रीराम की सेवाकर सेवा की मिशाल कायम की है, जिसका उल्लेख रामायण में मिलता है। वक्ताओं ने बताया कि वर्तमान में मानव माया के चक्कर में पड़ा हुआ है। धन को ही वह जीवन का परम पावन हिस्सा मान रहा है, जबकि धन साथ नहीं जाने वाला है।
Published on:
02 Jan 2019 02:04 am
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